{"_id":"607d34470170b02039399f44","slug":"uttarakhand-news-37-species-of-reptiles-in-alaknanda-central-ganga-and-lower-ganga","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड : अलकनंदा, मध्य गंगा और लोअर गंगा में हैं सरीसृपों की 37 प्रजातियां, वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड : अलकनंदा, मध्य गंगा और लोअर गंगा में हैं सरीसृपों की 37 प्रजातियां, वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन
Mon, 19 Apr 2021 01:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 19 Apr 2021 01:28 PM IST
सार
संस्थान के वरिष्ठ सरीसृप विज्ञानी डॉ. अभिजीत दास और डॉ. जेए जॉनसन की अगुवाई में शोधार्थियों ने अलकनंदा नदी के अलावा मध्य गंगा और लोअर गंगा में पाए जाने वाले सरीसृपों का अध्ययन किया।
विज्ञापन
अलकनंदा नदी
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विस्तार
उत्तराखंड की अलकनंदा नदी के अलावा मध्य गंगा और लोअर गंगा में मेढक, सांप समेत सरीसृपों की 37 प्रजातियां पाई जाती हैं। इस बात का खुलासा भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक शोध में किया गया है।
विज्ञापन
संस्थान के वरिष्ठ सरीसृप विज्ञानी डॉ. अभिजीत दास और डॉ. जेए जॉनसन की अगुवाई में शोधार्थियों ने अलकनंदा नदी के अलावा मध्य गंगा और लोअर गंगा में पाए जाने वाले सरीसृपों का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने अध्ययन के लिए नोक्चर्नल विजुअल एनकाउंटर सर्वे (एनवीईएस) तकनीक का इस्तेमाल किया।
विज्ञापन
शोध में अलकनंदा, मध्य गंगा और लोअर गंगा में सरीसृपों के 17 परिवारों की 37 प्रजातियां के साथ 20 प्रजातियों के मेढक होने का खुलासा किया गया है। मध्य गंगा और लोअर गंगा में पाए जाने वाले मेढकों की प्रजातियों की संख्या 25 से अधिक है।
विज्ञापन
वरिष्ठ सरीसृप विज्ञानी डॉ .अभिजीत दास के अनुसार उच्च हिमालई क्षेत्रों में अलकनंदा नदी में पाए जाने वाले मेढक मध्य और लोअर गंगा में पाए जाने वाले मेढकों से अलग हैं। दोनों क्षेत्रों में पाए जाने वाले मेढकों के शक्ल में भारी अंतर है।
प्रदूषण से जलीय जीवों, पक्षियों पर पड़ रहा असर
शोध में यह बात भी सामने आई है कि गंगा नदी में पिछले कई दशकों के बीच तेजी से बढ़ते प्रदूषण की वजह से न सिर्फ जलीय जंतुओं वरन नदी में पाए जाने वाले पक्षियों के जनजीवन पर विपरीत असर पड़ा। जलीय जंतुओं के साथ ही गंगा नदी में पाए जाने वाले पक्षियों की संख्या तेजी से घटी है।