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उत्तराखंड: औद्यागिक नगरी के शिलान्यास पर बोले प्रधानमंत्री ओली, विकास की ओर आगे बढ़ रहा नेपाल 

Tue, 23 Feb 2021 12:21 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 23 Feb 2021 12:21 AM IST
सार

  • दैजी-छैला औद्यागिक नगरी के शिलान्यास पर बोले नेपाल के प्रधानमंत्री 
  • औद्योगिक विकास से पैदा होंगे रोजगार के अवसर, रुकेगा विदेश को पलायन 
     

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Uttarakhand: Nepal Prime Minister KP Sharma Oli put foundation stone of industrial city
महेंद्रनगर के दैजी-छैला में औद्यागिक नगरी का शिलान्यास करते नेपाल क प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेपाल की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने उत्तराखंड से लगे सीमांत महेंद्रनगर के दैजी-छैला में प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित औद्योगिक क्षेत्र का सोमवार को शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि देश औद्योगिक विकास की ओर अग्रसर है। उद्योगों की स्थापना से नेपाल विकास में आगे बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे रोजगार के लिए विदेश को पलायन में कमी आएगी और स्थानीय स्तर पर आर्थिक समृद्धि बढ़ेगी।

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औद्योगिक विकास से सुदूर पश्चिम प्रदेश अब विकसित सुदूर पश्चिम प्रदेश बनेगा। उत्तराखंड की बनबसा सीमा से 17 किमी दूर नेपाल के कंचनपुर जिला मुख्यालय महेंद्रनगर की वेदकोट नगर पालिका क्षेत्र के दैजी-छैला में ढाई हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में करीब नौ अरब रुपये की लागत से औद्योगिक नगरी का निर्माण हो रहा है।
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उद्योग वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री लेखराज भट्ट ने कहा कि उद्योगपतियों को उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ताकि क्षेत्र के विकास के साथ यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार भी हो सके। उन्होंने कहा कि उर्वरक, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक और कपड़ा उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योगपतियों को सुगमता से भूमि दिलाई जाएगी। इस दौरान अर्थशास्त्रियों और अनुभवी इंजीनियरों से बनाया गया औद्योगिक क्षेत्र का मॉडल नक्शा भी सार्वजनिक किया गया। 
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 25 साल पुरानी है दैजी-छेला औद्योगिक नगरी योजना
नेपाल के सीमांत महेंद्रनगर के दैजी-छैला में स्थापित की जा रही औद्योगिक नगरी बनाने की योजना नई नहीं है, बल्कि 25 साल पहले ही औद्योगिक विकास की इस योजना पर विचार शुरू हो गया था। वेदकोट नगर पालिका के मेयर अशोक चंद के मुताबिक 25 वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन अधिकारी ने इस औद्योगिक क्षेत्र की योजना बनाई थी, लेकिन शुक्लाफांटा वन्यजीव अभयारण्य और वन्यजीवों का कॉरिडोर नजदीक होने के कारण वन विभाग से अनापत्ति न मिलने से योजना लटकी थी। उन्होंने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए वेदकोट नगर पालिका ने ढाई हजार हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई है। स्वीकृत डीपीआर के मुताबिक इस औद्योगिक नगरी में छोटे-बड़े 122 उद्योग लगेंगे। वहीं 30 हजार से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। 

नेपाल सीमा पर जवानों के संयम की विदेशों में भी हुई सराहना : डीआईजी

एसएसबी सीमांत मुख्यालय के डीआईजी एमएम कांडपाल ने कहा कि मित्र राष्ट्र नेपाल के साथ सुरक्षा का मुद्दा कभी नहीं रहा है। गलवां घाटी पर चीन के उपजाए विवाद के बाद नेपाल की तरफ से कुछ उपद्रवी तत्वों ने बॉर्डर पर जरूर एसएसबी के जवानों को उकसाने के प्रयास किए लेकिन जवानों ने संयम और धैर्य से काम लेते हुए मामलों को निपटा दिया। उनके संयम की सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई है।

डीआईजी कांडपाल यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल सीमा पर वर्तमान में हालात ठीक हैं। कभी-कभी नेपाल की तरफ से उपद्रवी तत्व छोटी-छोटी हरकतें करते हैं। चीन की ओर से गलवां घाटी पर उपजे विवाद के बाद सीमा पर हालात से निपटने संबंधी सवाल के जवाब में डीआईजी ने कहा कि नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार के कार्यकाल के दौरान उपद्रवी तत्व आए दिन सीमा पर एसएसबी के जवानों को उकसाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन हमारे जवानों ने संयम और धैर्य से काम लिया और स्थिति को निपटा लिया।

उन्होंने बताया कि चमोली आपदा में भी रानीखेत के राहत दल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और छह शवों को बरामद किया। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करते हुए सीमांत की इकाइयों ने 1.78 लाख पौधों का रोपण भी किया। सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए भी तमाम कार्य किए जा रहे हैं।

झूलापुल न खुलने से आक्रोशित नेपाल की महिलाओं ने किया प्रदर्शन

जौलजीबी में झूलापुल न खुलने से नेपाल की महिलाओं ने झूलापुल पर नेपाल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहां तैनात पुलिस का घेराव कर महिलाओं ने कहा कि भारत ने नेपाल सीमा पर सभी पुल खोल दिए हैं, लेकिन नेपाल सरकार ने अभी जौलजीबी, बलुवाकोट, एलागाड़ तिकड़म और सीतापुल (छांगरु) झूलापुल नहीं खोले हैं। इससे दोनों देशों के सीमांत के लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। 

सोमवार को नेपाल की महिलाओं ने संघर्ष समिति की अध्यक्ष हीरा चंद के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुल पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने नेपाल के जिलाधिकारी को पुल खोलने के लिए ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने कहा कि भारत ने जब पुल खोल दिए हैं। ऐसे में नेपाल सरकार का पुल को बंद करना गलत है। उन्होंने कहा कि पुल बंद होने के कारण स्कूली छात्रों, बीमार बुजुर्गों और पेंशन धारकों के साथ ही लोगों को भी भारी दिक्कतें हो रही हैं।

आपात स्थिति में और अतिआवश्यक कार्य होने पर लोगों को जौलजीबी से दार्चूला जाने में 28 किमी और बलुवाकोट नेपाल के लोगों को 15 किमी का सफर तय कर दार्चूला जाना पड़ रहा है, जिससे नेपाल के लोगों को समय और धन का अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। इस मौके पर धाना धामी, सीता चुनारा, गोमती भट्ट, नर्मदा धामी, विमला, शोभा, गीता, लक्ष्मी आदि महिलाएं मौजूद रहीं।

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