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ऋषिकेश: बिजनी-नैल आंतरिक मार्ग बंद, कैंपों में फंसे 50 से अधिक पर्यटक, कई जगह सड़क धंसी

Thu, 26 Aug 2021 11:59 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 26 Aug 2021 11:59 PM IST
सार

जिन यात्रियों के पास अपने वाहन नहीं हैं वे पहले ही पगडंड़ियों के सहारे बिजनी गांव होते हुए मुख्य सड़क तक पहुंच गए थे। वहीं निजी वाहनों से आए पर्यटक कैंपों में फंसे हुए हैं।

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Uttarakhand Monsoon Update Today: More Than 50 Tourist Stuck in Camp after cloudBurst in Rishikesh
ऋषिकेश में बादल फटने के बाद हालात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऋषिकेश में बीते मंगलवार शाम से हो रही बारिश के चलते पौड़ी जिला अंतर्गत यमकेश्वर ब्लॉक स्थित बिजनी-नैल आंतरिक मोटर मार्ग बाधित हो गया। मार्ग बाधित होने से नैल गांव में कैंप में ठहरे करीब 50 से अधिक यात्री वहीं फंस गए।

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जिन यात्रियों के पास अपने वाहन नहीं हैं वे पहले ही पगडंड़ियों के सहारे बिजनी गांव होते हुए मुख्य सड़क तक पहुंच गए थे। वहीं निजी वाहनों से आए पर्यटक कैंपों में फंसे हुए हैं। सड़क पर जमा मलबे के ढेर को हटाने के लिए लोनिवि दुगड्डा डिवीजन की जेसीबी लगी हुई है।
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लक्ष्मणझूला से करीब 25 किमी बिजनी-नैल गांव के लिए आंतरिक मोटर मार्ग है। नैलगांव के आसपास हेंवलनदी तट पर कैंप सजे हुए हैं। प्रकृृति की नैसर्गिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए विभिन्न प्रांतों के पर्यटक यहां पहुंचते हैं। बीते मंगलवार शाम से हो रही बारिश के चलते बिजनी-नैल मोटर मार्ग जगह-जगह बाधित हो गई।
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हस्पतिवार दोपहर चार बजे तक मार्ग बंद होने के कारण पर्यटक कैंपों में ही फंस गए। शाम करीब पांच बजे लोनिवि ने जेसीबी की मदद से सड़क पर जमा मलबे को हटाने का काम चल रहा है। लोनिवि दुगड्डा डिवीजन के अवर अभियंता अजय कुमार सैनी ने कहा कि बिजनी मोटर मार्ग पर आए मलबे को हटाने के लिए जेसीबी लगी हुई है। बारिश के कारण मार्ग बार-बार अवरुद्ध हो रहा है।

काटल गांव के आधे रास्ते से लौटी प्रशासन की टीम

टिहरी जिले के नरेंद्रनगर ब्लॉक के जसोला पटवारी क्षेत्र के काटल गांव में मंगलवार की रात को बादल फटने की घटना के दूसरेे दिन भी प्रशासन की टीम गांव में नहीं पहुंच पाई। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की टीम शिवपुरी से मात्र एक किलोमीटर से वापस नरेंद्रनगर लौट गई। नरेंद्रनगर के पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत ने काटल गांव पहुंचकर ग्रामीणों की पीड़ा सुनीं। 

मंगलवार की रात को 10 बजे काटल गांव में बादल फटा था। बादल फटने के बाद के बाद काटल गदेरा ऊफान पर आ गया था। उफनते गदेरे की चपेट में आने से कई लोगों के खेत बह गए थे। वहीं कुछ लोगों के घरों के आंगन के आगे पुश्ते ढह गए थे। बुधवार को स्थानीय लोगों को प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिल पाई। बृहस्पतिवार को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल और आपदा प्रबंधन मंत्री धन सिंह रावत के द्वारा हवाई दौरे होने की सूचना ग्रामीणों को मिली थी।

बताया जा रहा है कि विधानसभा सत्र के कारण वे नहीं आ सके। नरेंद्रनगर के पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत कई किलोमीटर पैदल चलकर काटल गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। स्थानीय निवासी राजवीर भंडारी, काटल नौडू की ग्राम प्रधान सीमा देवी ने कहा कि प्रशासन की टीम दूसरे दिन भी गांव में नहीं पहुंची। एसडीएम और प्रशासन की गाड़ी मार्ग बंद होने के चलते शिवपुरी से एक किलोमीटर आगे आकर वापस चली गई। जबकि शिवपुरी से काटल गांव की दूरी करीब 12 किलोमीटर है।

उन्होंने बताया कि शिवपुरी-तिमली मोटरमार्ग को खुलवाने के लिए लोनिवि नरेंद्रनगर के अधिकारियों को सूचना दी गई, लेकिन मार्ग खुलवाने के लिए जेसीबी नहीं भेजी गई। दूसरे दिन भी शिवपुरी-तिमली मोटरमार्ग बंद रहा। गांव के आसपास जंगल कैंपों में जो पर्यटक फंसे थे, पांच पयर्टक बुधवार को पैदल चलकर शिवपुरी तक पहुंच गए थे, सात पर्यटक बृहस्पतिवार को पैदल ही शिवपुरी तक पहुंचे। 

चार गांवों में दूसरे दिन नहीं आई बिजली, हाथी की दहशत

मंगलवार की रात को काटल गांव में बादल फटने की घटना के बाद तिमली, नौडू, काटल, और चौक गांव में विद्युत आपूर्ति ठप है। ऊर्जा निगम मुनिकीरेती के उपखंड अधिकारी मदन मोहन बहुगुणा ने बताया कि बादल फटने की घटना के बाद क्षेत्र में चार बिजली के पोल बह गए हैं, छोटी और बड़ी लाइन के 20 पोल क्षतिग्रस्त हुए हैं।

ऊर्जा निगम की टीम मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही है। मौसम साफ होते ही गांवों में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। चौक गांव में फुंके ट्रांसफार्मर को भी बदला जाएगा। वहीं गांव में विद्युत आपूर्ति ठप होने से लोगों के मोबाइल फोन भी बंद हो गए हैं।

लोग अपनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। पेयजल स्रोत क्षतिग्रस्त होने से पेयजल लाइन के पाइपों में मलबा भर गया है। ऐसे में ग्रामीणों को पुराने स्रोतों और गेदेरे से पाने का पानी लाना पड़ रहा है। गांवों में बिजली न होने से काटल, चौक और तिमली गांवों में लोगों को हाथी के हमले का भी डर सता रहा है।

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