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Premchand Aggarwal: लोकप्रियता ने बनाया लगातार चार बार विधायक तो उत्तेजित व्यवहार बना घातक, देना पड़ा इस्तीफा

Mon, 17 Mar 2025 12:53 PM IST
रेनू सकलानी राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 17 Mar 2025 12:53 PM IST
सार

बजट सत्र के दौरान सदन में क्षेत्रवाद पर दिए बयान से विवादों में घिरे कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने इस्तीफा दे दिया है। अपने सरकारी आवास में इस्तीफे की घोषणा करने के बाद उन्होंने सीएम आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को त्यागपत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने अग्रवाल का त्यागपत्र अग्रिम कार्यवाही के लिए राज्यपाल को भेज दिया है। 

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Uttarakhand minister agarwal resigns Popularity made MLA four consecutive times excited behavior became fatal
प्रेमचंद अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकप्रियता ने जहां प्रेमचंद अग्रवाल को लगातार चार बार विधायक बनाया। वहीं उनका उग्र और उत्तेजित होता स्वभाव उनके लिए नुकसानदायक साबित हुआ। उत्तेजित स्वभाव के चलते वह कई बार विवादों में घिरे और आखिरकार उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

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प्रेमचंद अग्रवाल के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1980 से हुई। जब वह देश के सबसे बड़े छात्र संगठन अभाविप के डोईवाला इकाई के अध्यक्ष बने। वर्ष 1984 में वह डीएवी पीजी काॅलेज के अभाविप इकाई के महासचिव बने। इसके बाद वह भाजयुमो व भाजपा में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
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वर्ष 1996 व 2000 में भाजपा देहरादून जिला अध्यक्ष के पद पर भी रहे। वर्ष 2003 में व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष बने। छात्र राजनीति से लेकर क्षेत्र की राजनीति के सफर में उन्होंने काफी लोकप्रियता हासिल की।

व्यवहार में उत्तेजना उन्हें विवादों में डालती रही
इसी का नतीजा रहा है वर्ष 2007 से वह चार बार लगातार ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए और हर बार उनकी जीत का अंतर बढ़ता गया। लगातार सफलता उनके व्यवहार में भी परिवर्तन लाती गई और धीरे-धीरे उनका व्यवहार भी उग्र होता गया।

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बात-बात पर उत्तेजित होना जैसे उनकी आदत बन गई। व्यवहार में उत्तेजना उन्हें विवादों में डालती रही। प्रेमचंद अग्रवाल के व्यवहार में उत्तेजना इतनी हावी हो गई कि वह अपने पद और दायित्व को भूल बीच सड़क पर ही लोगों से हाथापाई तक करने लगे। यहां तक कि वह विधानसभा सत्र में भी विवादित बयान दे गए। व्यवहार में उत्तेजना और बढ़ती उग्रता अग्रवाल के विरोधियों के लिए एक हथियार साबित हुई।

अग्रवाल का राजनीतिक सफर

2007 में पहली बार बने विधायक, सदस्य आवास समिति विधान सभा।

2008 में सदस्य याचिका समिति विधान सभा।

2009 में संसदीय सचिव, औद्योगिक विकास, संबद्ध सीएम।

2012 में दूसरी बार बने विधायक, सदस्य अनुसूचित जाति जनजाति एवं विमुक्त जाति समिति विधान सभा।

2013 में सदस्य आवास समिति विधान सभा।

2014 सदस्य, प्राक्लन समिति विधान सभा।

2017 में तीसरी बार विधायक

2017 विधान सभा अध्यक्ष।

2017 में कार्यकारी सदस्य राष्ट्रमंडलीय संसदीय संघ, भारत परिक्षेत्र।

2022 में चौथी बार विधायक, कैबिनेट मंत्री वित्त, शहरी विकास एवं आवास, विधायी एवं संसदीय कार्य, जनगणना एवं पुर्नगठन मंत्री।

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