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लोक सभा चुनाव 2024: तब देहरादून से चलती थी पश्चिम उत्तर प्रदेश के कैराना तक की सियासत, पढ़ें खास लेख

Sun, 24 Mar 2024 06:13 PM IST
अलका त्यागी अश्वनी त्रिपाठी, अमर उजाला, देहरादून
अश्वनी त्रिपाठी, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 24 Mar 2024 06:13 PM IST
सार

आज बेशक कैराना पश्चिमी उत्तरप्रदेश की सियासत का नया केंद्र हो, लेकिन 1957 तक सहारनपुर, बिजनौर और मुजफ्फरनगर में कैराना तक के हिस्से की सियासी कमान दून के हाथों में थी।

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Uttarakhand Lok Sabha Elections 2024 Then politics used to run from Dehradun to Kairana in Western Uttar Prade
उत्तराखंड लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की आजादी के बाद देहरादून से पश्चिम उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति में महावीर त्यागी मशहूर राजनीतिक शख्सियत थे। उन्होंने देश की संसद में देहरादून का तीन बार प्रतिनिधित्व किया। उस दौर में देहरादून लोस सीट का अपना इतिहास था। तब पश्चिमी उत्तरप्रदेश के कैराना तक देहरादून से सियासत चलती थी। देश की आजादी के बाद देहरादून एक तरह से पहाड़ और पश्चिम उप्र की राजनीति का बड़ा पावर हाउस बन गया था।

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आज बेशक कैराना पश्चिमी उत्तरप्रदेश की सियासत का नया केंद्र हो, लेकिन 1957 तक सहारनपुर, बिजनौर और मुजफ्फरनगर में कैराना तक के हिस्से की सियासी कमान दून के हाथों में थी। देहरादून में जहां त्यागी निवास करते थे, बाद में उस स्थान को जोड़ने वाली सड़क का नाम उन्हीं के नाम पर पड़ गया। इसी त्यागी रोड पर उनकी कोठी थी, जिसे सांसद निवास के नाम से पुकारा जाता था। यह कोठी किसानों का अस्थाई ठिकाना होती थी। बाद में इस कोठी को महावीर त्यागी ने पुरातत्व विभाग को दान में दे दिया, जहां अभी भी पुरातत्व विभाग का दफ्तर है।
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1951 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ। देहरादून डिस्ट्रिक्ट कम बिजनौर डिस्ट्रिक्ट (नॉर्थ वेस्ट) कम सहारनपुर डिस्ट्रिक्ट (वेस्ट) सीट पर महावीर त्यागी कांग्रेस के प्रत्याशी बनाए गए। स्वतंत्रता संग्राम के दौर से ही पश्चिम उप्र में किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय महावीर त्यागी को चुनाव में 63.73 प्रतिशत वोट मिले। किसानों ने बड़ी संख्या में महावीर त्यागी को वोट देकर सांसद चुना। भारतीय जनसंघ के जेआर गोयल को मात्र 13.81 प्रतिशत वोटों से ही संतोष करना पड़ा। त्यागी रोड स्थित सांसद की कोठी पर सुबह से ही किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर अपनी समस्याओं के निस्तारण के लिए पहुंच जाते थे। महावीर त्यागी सभी की समस्याएं सुनकर उनका निस्तारण कराते थे।
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तीन बार सांसद चुने गए
31 दिसंबर, 1899 को उप्र के मुरादाबाद जिले में जन्मे महावीर त्यागी 1951 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में देहरादून से कांग्रेस से सांसद चुने गए। 1957 के चुनाव में उन्हें दोबारा जीत मिली। 1962 के चुनावों में महावीर त्यागी ने लगातार तीसरी जीत हासिल की। 1967 के लोस चुनाव में वह निर्दलीय प्रत्याशी यशपाल सिंह से चुनाव हार गए।

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सैन्य अधिकारी का पद छोड़ स्वतंत्रता संग्राम में हुए शामिल
महावीर त्यागी के पौत्र एडवोकेट अनिल नौरिया बताते हैं कि उनके नाना महावीर त्यागी बड़ी ही बेबाकी से अपनी राय रखते थे। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग कांड के बाद वह अंग्रेजी हुकूमत से भिड़ गए थे। सेना में अधिकारी पद छोड़कर वह स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होकर महात्मा गांधी के साथ हो लिए। उन्हें 11 बार अंग्रेजों ने जेल भेजा।

कुली का काम किया, अखबार भी निकाला
सेना में अच्छी नौकरी छोड़कर वह स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए तो शुरुआती दौर में उन्हें कुली का काम करना पड़ा। उनकी पुत्री उमा रानी के आलेख के मुताबिक परिवार की जमींदारी से हिस्सा न लेना पड़े इसलिए उन्होंने हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करना शुरू किया। बिजनौर से गरीब नाम का एक अखबार भी उन्होंने निकाला और आजादी के लिए युवाओं को प्रेरित करने लगे। आजादी के बाद वह पहले दून के अजबपुर में रहे, जहां वह दूध बेचने का काम करते थे। इसके बाद त्यागी रोड पर बनी कोठी में शिफ्ट हुए।

गजट में दर्ज है त्यागी पुलिस के सराहनीय प्रयास
इतिहास के जानकार कहते हैं कि महावीर त्यागी ने किसानों के लिए बहुत काम किया। देहरादून के जौनसार बाबर क्षेत्र में भूमि सुधार व किसानों के ऋण की समस्या को हल करने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। इसमें उन्होंने सदस्य रहते हुए किसानों के लिए कर्ज मुक्ति कानून बनवाया। आजादी के बाद सांप्रदायिक संघर्ष की स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने पुलिस की वर्दी धारण की और एक विशेष पुलिस दल बनाया। जो दंगे में अपनी जान की परवाह न करते हुए लोगों की जान बचाने का काम करता था। इस संगठन को यूपी के सरकारी गजट में त्यागी पुलिस का नाम दिया गया। गोविंद बल्लभ पंत व लाल बहादुर शास्त्री ने लोगों की जान बचाने में त्यागी पुलिस के प्रयासों की सराहना की थी।

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