उत्तराखंड लॉकडाउन: घरवापसी की प्रक्रिया शुरू, अन्य राज्यों में फंसे डेढ़ लाख प्रवासियों को वापस लाएगी सरकार
- मुख्य सचिव ने केेंद्रीय गाइडलाइन से पैदा हुई असमंजस की स्थिति दूर की, बोले- घरवापसी की प्रक्रिया हो चुकी है शुरू
- प्रवासियों से धैर्य बनाकर रखने की अपील, कहा- सरकार कर रही उनको वापस लाने के लिए हरसंभव कोशिश
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उत्तराखंड सरकार अन्य राज्यों में फंसे लगभग डेढ़ लाख प्रवासियों की सुरक्षित घर वापसी करवाएगी। केवल रिलीफ कैंपों और श्रमिकों को लाने के लिए जारी केंद्रीय गाइडलाइन से पैदा हुई असमंजस की स्थिति को सरकार ने दूर किया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि डेढ़ लाख से अधिक पंजीकृत हो चुके प्रवासी प्रदेश में लाए जाएंगे, इसके लिए प्रदेश सरकार प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
सरकार ने अन्य राज्यों में फंसे उत्तराखंड के मूल निवासियों की घर वापसी के लिए केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। आनलाइन और कॉल सेंटरों के माध्यम से 1.65 लाख प्रवासियों ने पंजीकरण करवाया। सरकार ने इसके लिए उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों को भेजने के साथ केंद्र से 12 ट्रेनें चलाने की मांग की थी। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नई गाइडलाइन जारी कर दी कि केवल रिलीफ कैंपों में फंसे और श्रमिकों को ही राज्य वापस लाए। इस आदेश के बाद प्रवासियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। रिलीफ कैंपों में बेहद कम संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी ठहरे हुए हैं।
मंगलवार को मीडिया सेंटर में हुई पत्रकार वार्ता में मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार पंजीकृत हुए प्रत्येक प्रवासी को वापस लाएगी। चरणबद्ध तरीके से उनको लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। चंडीगढ़ और जयपुर से बड़ी संख्या में लोग आ चुके हैं। जहां जहां प्रवासी हैं उन राज्यों से संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने प्रवासियों से अपील की है कि वे धैर्य बनाकर रखें, सरकार उनको वापस लाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है।
प्रदेश में पहुंच चुके हैं 5669 प्रवासी
प्रदेश सरकार अभी तक 5669 लोगों को वापस ला चुकी है। इसके अलावा राज्य के भीतर कई लोग एक जिले से अपने गृह जिले में जाना चाहते थे। ऐसे सात हजार लोगों को भेजा जा चुका है।राज्य में 35 हजार ऐसे लोग हैं जो दूसरे राज्यों से हैं। उन्होंने पंजीकरण करवा लिया है। उनको भी गृह राज्य में भेजने की व्यवस्था की जा रही है।
रेड जोन और कंटेनमेंट एरिया में दिक्कत
मुख्य सचिव ने बताया कि उत्तराखंड के कई लोग महाराष्ट्र और दिल्ली सहित ऐसे राज्यों में हैं जहां कोविड-19 का संक्रमण ज्यादा है। रेड जोन और कंटेनमेंट एरिया में फंसे प्रवासियों को लाने में दिक्कत आएगी। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ेगा। लेकिन इस तरह के लोग भी निराश न हों, सरकार कोई न कोई हल निकालेगी।
अपने घर में हैं तब भी आ सकते हैं
मुख्य सचिव ने साफ किया कि अगर कोई प्रवासी वहां अपना घर बनाकर या किराये के मकान में रह रहा है, तो उसे भी लाया जा सकता है। अगर इस तरह के लोगों ने पंजीकरण करवाया है, तो उनकी वापसी भी करवाई जाएगी।
1.65 लाख प्रवासी करा चुके हैं पंजीकरण
केंद्र सरकार ने प्रवासियों की घरवापसी की हरी झंडी दिखाई तो राज्य सरकार ने भी ( http://dsclservices.in/uttarakhand-migrant-registration.php) वेबसाइट पर पंजीकरण की प्रक्रिया आरंभ कर दी। मंगलवार तक वेबसाइट पर 1.65 लाख प्रवासी घरवापसी के लिए पंजीकरण करा चुके थे।
प्रवासियों से जुड़े तथ्य
-131 लाख प्रवासी बाहरी राज्यों से उत्तराखंड लौटना चाहते हैं
-30 हजार प्रवासी बाहरी राज्यों के हैं, जो घरवापसी करना चाहते हैं
-6000 प्रवासियों को राज्य में ला चुकी है सरकार
-4000 प्रवासियों को राज्य से बाहर भेजा जा चुका
-70 फीसदी प्रवासी श्रमिक व कामगार जिन्होंने वापसी की
-01 दर्जन राज्यों ने प्रवासियों को भेजने की सहमति नहीं दी
सबसे ज्यादा दिल्ली से लौटना चाहते हैं प्रवासी
सबसे ज्यादा करीब 40 हजार प्रवासी दिल्ली से लौटना चाहते हैं। इनमें बहुत बड़ी संख्या उन युवाओं की है, जो होटल व्यवसाय में कार्यरत था और लॉकडाउन के बाद बेरोजगार हो गया। इसके बाद 22 हजार से अधिक लोग यूपी, 20 हजार लोग हरियाणा, 17 हजार लोग महाराष्ट्र , करीब 8500 प्रवासी पंजाब से आना चाहते हैं। देश के 36 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से प्रवासी उत्तराखंडियों ने घरवापसी के लिए पंजीकरण कराया है।
विशेष ट्रेन के लिए भी प्रयास शुरू
मुख्य सचिव के मुताबिक, प्रवासियों को लाने के लिए रेल विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। राज्य सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों के नोडल अफसरों के बीच रेल से प्रवासियों को भेजने को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है।