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चंपावत: अंगीठी की गैस में दम घुटने से बुजुर्ग की मौत, मृतक की पत्नी खतरे से बाहर 

Sun, 10 Jan 2021 10:19 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 10 Jan 2021 10:19 PM IST
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Uttarakhand Latest News: Old Age Man Died due to angithi gas suffocation in Champawat
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के चंपावत में अंगीठी की गैस से दम घुटकर चौड़ाकोट गांव के एक बुजुर्ग की मौत हो गई। बुजुर्ग की पत्नी भी बेहोश हो गई थी। इलाज के बाद उसकी तबीयत में सुधार है। चंपावत जिले में गैस से दम घुटकर मौत की इस साल की यह पहली घटना है। बता दें कि रुद्रपुर में 18 दिसंबर को अंगीठी के धुएं में दम घुटने से जसपुर के मोहल्ला भूपसिंह निवासी दो युवकों की मौत हो गई थी, जबकि तीसरे युवक को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

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पाटी ब्लॉक के चौड़ाकोट गांव निवासी तेज सिंह (70) पुत्र हर सिंह और उनकी पत्नी बसंती देवी (60) रात में अंगीठी जलाकर सो गए थे। रविवार सुबह उनकी बहू ने जब उन्हें चाय देने के लिए दरवाजा खटखटाया तो किसी ने दरवाजा नहीं खोला। संदेह होने पर बहू ने पड़ोसियों को बुलाया और कमरे का दरवाजा खुलवाया। अंदर देखा तो बुजुर्ग दंपती बेसुध पड़ा था। 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया गया। इससे पहले कि एंबुलेंस आती तेज सिंह ने दम तोड़ दिया।
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अचेत बसंती देवी को पाटी के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आभाष सिंह ने बताया कि इलाज के बाद बुजुर्ग महिला की तबीयत में सुधार है। जब महिला को ठीक होने पर घर लाया गया तो पति की मौत के सदमे में वह कई बार बेहोश हो गई। बुजुर्ग दंपती के तीनों बेटे नाथ सिंह, कमल सिंह और जीवन सिंह दिल्ली में निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। उनके घर पहुंचने पर सोमवार को तेज सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

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बंद कमरे में अंगीठी जलाने से फेफड़ों तक पहुंचती है कार्बन मोनोऑक्साइड

बंद कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी को जलाए रखना बेहद खतरनाक है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि बंद कमरे में अंगीठी जलने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। अंगीठी की गैस (कार्बन मोनोऑक्साइड) सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचती है। इससे गैस खून में मिल जाती है और हीमोग्लोबिन कम होने से इंसान दम तोड़ देता है। अंगीठी से निकलने वाली गैस फेफड़ों के अलावा आंखों को भी नुकसान पहुंचाती है। आंखों पर सूखेपन से जख्म का खतरा बढ़ जाता है। 

अंगीठी जलाएं, तो ये सावधानियां जरूर बरतें
कमरे को पूरी तरह बंद न करें। खिड़की को जरूर थोड़ा खुला रखें। कमरे में अंगीठी जलाते वक्त पानी भरी एक बाल्टी रख लें, ऐसा करने से कमरे में नमी रहेगी। इससे गैस का खतरा कम होगा। अंगीठी के पास किसी भी तरह की पॉलीथिन या प्लास्टिक का सामान न रखें।

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