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उत्तराखंड : एमएसएमई की श्रेणी में आएंगे ज्यादा उद्योग, मिलेंगी सहूलियतें

Fri, 18 Sep 2020 02:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 18 Sep 2020 02:50 PM IST
सार

  • निवेश और टर्नओवर के आधार पर एमएसएमई की नई परिभाषा को कैबिनेट की मंजूरी
  • विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के उद्योगों की एक समान होगी श्रेणी
  • प्रदेश में एक जुलाई 2020 से लागू होगी एमएसएमई की नई श्रेणी 

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uttarakhand latest news :  More industries will come under MSME category
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

केंद्र सरकार की ओर से एमएसएमई उद्योगों के लिए तय की गई नई परिभाषा प्रदेश में लागू करने को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। निवेश और टर्नओवर की सीमा बढ़ने से ज्यादा उद्योगों को एमएसएमई नीति में मिलने वाली छूट व अन्य रियायतों का लाभ मिल सकेगा। 
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उत्तराखंड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति एवं क्रियान्वयन आदेश 2015 में संशोधन कर केंद्र की ओर से तय की गई एमएसएमई परिभाषा को प्रदेश में एक जुुुलाई 2020 से लागू किया जाएगा। नई परिभाषा में सूक्ष्म उद्योग की श्रेणी में वे उद्योग आएंगे, जिनमें मशीनरी और प्लांट लगाने में एक करोड़ का निवेश और सालाना कारोबार पांच करोड़ तक होता है। वहीं, लघु उद्योग में 10 करोड़ का निवेश और 50 करोड़ का टर्नओवर, मध्यम उद्योग की श्रेणी में 50 करोड़ का निवेश और 250 करोड़ का कारोबार करने वाले उद्योग आएंगे। 
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इस नीति में केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से उद्योगों को कई तरह की छूट और रियायतें दी गई हैं। लेकिन अभी तक एमएसएमई उद्योगों में निवेश की सीमा कम होने के कारण कई उद्योग लाभ लेने से वंचित थे। निवेश और टर्नओवर की सीमा बढ़ने से प्रदेश में ज्यादा उद्योगों को एमएसएमई का लाभ मिलेगा। 
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प्रदेश में 63 हजार से अधिक एमएसएमई उद्योग

उत्तराखंड में 63 हजार से अधिक एमएसएमई उद्योग स्थापित हैं। जिनमें 25 लाख निवेश वाले उद्योग सूक्ष्म श्रेणी, 25 लाख से पांच करोड़ तक लघु और पांच से 10 करोड़ वाले उद्योग मध्यम श्रेणी में आते थे। इसी तरह सेवा क्षेत्र में 10 लाख निवेश वाले सूक्ष्म, 10 लाख से दो करोड़ तक वाले लघु और दो से पांच करोड़ तक के मध्यम श्रेणी में आते थे। नई परिभाषा में निवेश और टर्नओवर की सीमा बढ़ाकर एमएसएमई की श्रेणी तय की गई है। वहीं, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के लिए एक समान श्रेणी होगी।
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