एक्सक्लूसिव: यहां वृद्ध और दिव्यांग इतने खुद्दार कि मिल रही सरकारी पेंशन से कर रहे इंकार
- आर्थिक स्थिति सुधरने पर कई लोगों ने स्वेच्छा से लौटाई पेंशन
- देहरादून जिले में दो महीने में 30 और एक साल में 120 वृद्ध व दिव्यांगों ने पेंशन बंद कराने को विभाग को दिया पत्र
- ज्यादातर के बेटे व पोतों की नौकरी लगी या व्यवसाय शुरू किया, बोले- अब पात्रता श्रेणी से बाहर हुए तो हकदार नहीं
विस्तार
बहुधा सरकार द्वारा वंचित वर्ग के लिए संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं का संपन्न वर्ग के लोग जानकारी छिपाकर लाभ लेते हैं, लेकिन दूसरी ओर ऐसे भी ईमानदार लोग हैं जो आर्थिक स्थिति सुधरने के बाद वृद्धावस्था, दिव्यांग पेंशन लौटा रहे हैं।
देहरादून जिला समाज कल्याण विभाग में पिछले दो महीनों में 30 पेंशनरों ने पेंशन बंद कराने का आग्रह किया है। इनमें अधिकांश ऐसे वृद्ध हैं जो पहले आर्थिक रूप से कमजोर थे, मगर अब उनके बेटे व पोते की सरकारी एवं निजी नौकरी लगी है या किसी ने व्यवसाय शुरू किया है।
अब उन्हें सदस्यों से खर्चे के लिए पर्याप्त पैसे मिल रहे हैं। साथ ही अब वे पात्रता श्रेणी से भी बाहर हो चुके हैं। पेंशन बंद कराने के लिए विभाग में पिछले एक साल में 120 से ज्यादा आवेदन पहुंचे हैं।
इन्होंने बढ़या हाथ
केस 1 : समाज कल्याण कार्यालय में आवेदन के लिए पहुंचे भागवत सिंह बिष्ट (हरबर्टपुर) ने बताया कि वह 2006 में सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त हुए। विभाग से उनकी पेंशन नहीं लगी थी। वह कोर्ट में केस लड़ रहे थे। आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। इसलिए वृद्धावस्था पेंशन का लाभ लेना शुरू किया, लेकिन अब इसी फरवरी में कोर्ट के आदेश पर उनकी कर्मचारी पेंशन शुरू हो गई। इसके बाद वह वृद्धावस्था पेंशन बंद करा रहे हैं।
केस 2 : मसूरी निवासी सीता ने बताया कि वह दिव्यांग पेंशन का लाभ लेती थीं, क्योंकि उनके पिता स्कूल में कुक का काम करते हैं। पांच भाई-बहन हैं। सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही थीं, पेंशन के 1200 रुपये से कुछ मदद मिलती थी। अब सितंबर में उनकी भारतीय खाद्य निगम चंडीगढ़ में नौकरी लग गई है। इसलिए कुछ दिन बाद ही समाज कल्याण कार्यालय जाकर पेंशन बंद कराने के लिए पत्र देकर आईं।
केस 3 : ओल्ड नेहरू कॉलोनी निवासी कुंती देवी ने बताया कि पहले बेटे की नौकरी नहीं लगी थी। परिवार में आर्थिक परेशानी रहती थी। इसकी वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन किया था। अब बेटा प्राइवेट नौकरी पर लग गया है। अच्छा होगा यह पेंशन वास्तविक जरूरतमंद को मिल जाए।
केस 4 : ग्राम दुमेट (चिलियो) निवासी पानो देवी पत्नी स्व. नूपा ने कहा कि उनके दो बेटे हैं। इनमें एक की सरकारी नौकरी लगी है, जबकि दूसरे ने भी व्यवसाय शुरू कर दिया है। वह अब छोटे बेटे के साथ रहती हैं जो सरकारी नौकरी करता है। 6 महीने से आर्थिक स्थिति सुधर गई है। अब वह पेंशन नहीं लेना चाहती हैं।
केस 5 : ननूरखेड़ा निवासी भागीरथी देवी ने कहा कि वह अपने पोते के साथ रहती हैं। पोते ने व्यवसाय शुरू किया है, जिसमें लाभ होने लगा है। पोता उन्हें पूरी तरह से आर्थिक मदद करता है और ध्यान रखता है। इसलिए पोते की सलाह के बाद वह स्वेच्छा से वृद्धावस्था पेंशन बंद कराना चाहती हैं। साथ ही अगस्त के बाद उनके खाते में भेजी पेंशन की राशि भी वापस ले ली जाए।
यह है पात्रता
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित वृद्धावस्था, दिव्यांग व विधवा पेंशन के लिए आवेदक की पारिवारिक मासिक आय (सभी सदस्यों की) 4 हजार रुपये होनी चाहिए। पटवारी से आय प्रमाणपत्र बनवाने के बाद पेंशन आवेदन व आवश्यक प्रमाणपत्रों के साथ तहसीलदार व एसडीएम से स्वीकृति ली जाती है। इसके बाद विभाग पेंशन स्वीकृत करता है।
अपात्रों को विभाग भेज चुका है नोटिस
पिछले महीने विभाग ने पेंशन का लाभ ले रहे 17 अपात्र लोगों को नोटिस जारी किए हैं। विभाग ने भौतिक सत्यापन में पाया कि ये लोग पात्रता श्रेणी से बाहर थे। हैरानी की बात है कि कई लोगों के बेटे सरकारी नौकरी पर हैं, जबकि किसी के पत्नी या पति सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हैं। विभाग अब वसूली कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है। बताया गया कि ये सभी अपात्र डोईवाला ब्लॉक के हैं।
पिछले दो महीने में विभाग के पास कई वृद्ध पेंशनरों ने पेंशन बंद कराने को पत्र दिया है, जिसमें कई महीने की पेंशन वापस लेने का भी आग्रह किया। ऐसे ईमानदार लोगों का विभाग विशेष रूप से आभार जताता है। इन्होंने उन लोगों को भी सीख दी है जो पात्रता श्रेणी से बाहर होने पर भी योजनाओं का लाभ लेने की लालसा रखते हैं।
- हेमलता पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी(देहरादून)