उत्तराखंडः बागी विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
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बागियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उत्तराखंड विधानसभा स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
बुधवार को कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा स्पीकर के फैसले पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद अब नौ बागी विधायक आगामी विधानसभा सत्र में भाग नहीं ले पाएंगे।
हालांकि कोर्ट ने कहा कि अगले हफ्ते इस मामले में आखिरी फैसला सुनाया जाएगा, लेकिन तब तक स्पीकर के फैसले को जारी रखा जा रहा है। बागी विधायकों द्वारा मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश के फैसले को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में बागी विधायकों द्वारा आगामी विधानसभा सत्र में भाग लेने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की अर्जी पर होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें लगी हुई है। कांग्रेस, भाजपा व अन्य राजनीतिक दलों के बीच इस लेकर चर्चाएं जोरों पर है। चर्चा का विषय यही है अगर बाकी विधायकों के पक्ष में फैसला गया तो..? क्या इससे हरीश रावत की सरकार अस्थिर हो जाएगी? अरुणाचल प्रदेश की तरह कांग्रेस भी यहां नेतृत्व परिवर्तन का दांव खेल सकती है या फिर हरीश रावत इस अग्नि परीक्षा को पास कर जाएंगे?
सदस्यता रद्द करने के मामले में फंस रहा ये पेच
फिलहाल सभी अपनी-अपनी तरह से कयास लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों व संविधान विशेषज्ञों की नजर सु्प्रीम कोर्ट के फैसले पर लगी हुई है। उनका मानना है कि मुद्दा अविश्वास प्रस्ताव लंबित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा विधायकों की सदस्यता रद्द किए जाने का है।
विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव 18 मार्च को लाया गया था और उन्होंने नौ विधायकों की सदस्यता 27 मार्च को रद्द की है। संविधान के अनुच्छेद 179 (सी) के तहत विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लंबित होने की स्थिति में वह नीतिगत फैसले नहीं ले सकता है।
यहां तक की विधानसभा की कार्रवाई की अध्यक्षता भी नहीं कर सकता है। उनका कहना है कि नौ विधायकों पर दल-बदल विरोधी कानून लागू होता या है नहीं यह तो बाद का विषय है। क्योंकि इस पर फैसला कौन लेगा? जिसको फैसला लेना है, उसके खिलाफ तो अविश्वास प्रस्ताव लंबित है।
ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लिया गया फैसला मान्य नहीं होगा। खैर, इन तमाम सवालों के जवाब अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी मिल सकेंगे।