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छत्तीसगढ़ के सुकुमा में माओवादी हमले में नैनीताल का लाल शहीद
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 12 Mar 2017 08:40 PM IST
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heera ballabh
- फोटो : file photo
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छत्तीसगढ़ के सुकमा क्षेत्र में हुए नक्सली हमले में शहीद सहायक सब इंस्पेक्टर हीरा बल्लभ भट्ट को रविवार को परिजनों और ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। उनके पैतृक आवास पर भीड़ के बीच ‘हरीश तेरा ये बलिदान, याद रखेगा हिंदुस्तान’, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा हरीश तेरा नाम रहेगा’, ‘भारत माता की जय’ आदि नारों की बीच शहीद की अंतिम यात्रा निकली।
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बीते दिवस सुकमा में हुए नक्सली हमले में 12 जवान शहीद हो गए थे, जिनमें स्थानीय निवासी हीरा बल्लभ भट्ट भी थे। शनिवार को सहायक सब इंस्पेक्टर हीरा बल्लभ की शहादत की सूचना मिलते ही गांववाले शोक में डूब गए। पत्नी और बूढ़ी मां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। भाई-बहन, रिश्तेदार, सगे संबंधी, मित्र और क्षेत्र के लोगों की भारी भीड़ का जमावड़ा घर पर लगा रहा।
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रविवार को दोपहर दो बजे जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर रोपड़ा स्थित भट्ट निवास पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। हर आंख नम थी। पत्नी समता भट्ट, बेटी डिंपल (12), मां नंदी देवी (80), बहनें मीरा, जानकी और दुर्गा तथा बड़े भाई दिनेश और घनानंद शव से लिपटकर रोने लगे। पत्नी समता तो कई बार सुध बुध खो बैठी। सीआरपीएफ के डीआईजी प्रवीन कुमार, सेनानायक पीके सिंधावा, सहायक सेनानायक लोकेश बाबू और राणा प्रताप आदि जवानों ने शहीद की परिजनों के समक्ष शोक संवेदना व्यक्त की। बाद में शहीद के शव को चित्रशिला घाट रानीबाग ले जाया गया।
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तहसीलदार प्रियंका, एएसपी हरीश चंद्र सती, सीओ विजय थापा, थानाध्यक्ष प्रमोद पाठक, ज्योलीकोट चौकी इंचार्ज मन्न्वर सिंह और तहसीलदार प्रियंका आदि ने भी शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ग्राम प्रधान जीवन चंद्र, रामदत्त चनियाल, शेखर भट्ट, पूर्व प्रधान दान सिंह जीना, हरीश भट्ट, भगवती सुयाल, महेंद्र नेगी, सेवानिवृत्त डीआईजी नवीन भट्ट, संत एंथोनी इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य, शिक्षिकाओं और क्षेत्र के लोगों ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए शहीद को अंतिम विदाई दी।
बेटी के जन्मदिन पर घर से उठी पिता की अर्थी
नक्सली हमले में शहीद हीरा बल्लभ भट्ट (43) गांव और मित्रों के बीच हरीश नाम से ही जाने जाते थे। राइंका ज्योलीकोट से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद करीब 25 साल पहले वह सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। वक्त ने सबसे बड़ा घाव तो हरीश की 12 वर्षीय बेटी डिंपल को दिया है, जिसका आज ही (12) मार्च को जन्मदिन है, लेकिन जन्मदिन के मौके पर इस मासूम को वक्त ने वो घाव दिया जिसे वह कभी भी नहीं भूल पाएगी।
हरीश ने दो साल पहले ही गांव में अपना नया मकान बनाया था। गृह प्रवेश के दौरान ही उन्होंने अपने पुत्र शुभम का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार कराया था। हरीश की बुजुर्ग मां नंदी देवी (80) ने नम आंखों से बताया कि कठिन पारिवारिक परिस्थितियों के बाद भी उनके बड़े दोनों पुत्रों की तरह हरीश ने भी अपने भविष्य का मार्ग खुद ही तैयार किया। बकौल नंदी देवी उन्होंने कई बार हरीश से वीआरएस लेकर घर आने को कहा, लेकिन हरीश हमेशा ही यही कहता था कि ‘मां चिंता क्यों करती है, डरा मत कर कुछ नहीं होता’। परिजनों ने बताया कि बीती 20 जनवरी को हरीश घर आए थे।
साथी शिक्षिका बोली-हो गया था अनहोनी का अहसास
शहीद हीराबल्लभ भट्ट की पत्नी समता भट्ट के साथ की शिक्षिका जानकी जोशी बताती है कि शनिवार को प्रात: साढ़े दस बजे जब टीवी में नक्सली हमले की खबर आई तो उनको कुछ अनहोनी का एहसास सा हुआ और उन्होंने अपने पति मोहन जोशी से इस संबंध में चर्चा करते पूछा जीजाजी (हीरा बल्लभ भट्ट) आजकल इसी इलाके में हैं ना? और शाम होते होते यह बुरी खबर आ गई।