फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand High Court Support Act to impose water tax on hydropower generation

उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने जल विद्युत उत्पादन पर वाटर टैक्स लगाने संबंधी एक्ट को ठहराया सही 

Sun, 14 Feb 2021 05:56 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 14 Feb 2021 05:56 PM IST
विज्ञापन
Uttarakhand High Court Support Act to impose water tax on hydropower generation
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के जल विद्युत उत्पादन पर वाटर टैक्स लगाने संबंधी एक्ट को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ विभिन्न हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट कंपनियों की ओर से दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। पूर्व में कोर्ट ने 2016 में इस एक्ट के क्रियान्वयन में रोक लगाई थी।

विज्ञापन


हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उत्तराखंड सरकार को राहत मिली है।  हाइड्रो पावर कंपनियों व उत्तर प्रदेश विद्युत निगम ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील करने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष पूर्व में हुई सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था। जिसके बाद कोर्ट ने शुक्रवार को यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। मामले के अनुसार अलकनंदा हाइड्रो पावर लिमिटेड, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड, नेशनल हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन, सहित अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें कहा था कि राज्य बनने के बाद उत्तराखंड सरकार ने राज्य की नदियों में जल विद्युत परियोजनाएं लगाने के लिए विभिन्न कंपनियों को आमंत्रित किया और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश राज्यों व जल विद्युत कंपनियों के मध्य करार हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिसमें तय हुआ कि कुल उत्पादन के 12 फीसदी बिजली उत्तराखंड को निशुल्क दी जाएगी। जबकि शेष बिजली उत्तर प्रदेश को बेची जाएगी। लेकिन 2012 में उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड वाटर टैक्स ऑन इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन एक्ट बनाकर जल विद्युत कंपनियों पर वायर की क्षमतानुसार 2 से 10 पैंसा प्रति यूनिट वाटर टैक्स लगा दिया। जिसे याचिकाकर्ताओं की ओर से चुनौती दी गई थी।


हाईकोर्ट ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि विधायिका को इस तरह का एक्ट बनाने का अधिकार है। यह टैक्स पानी के उपयोग पर नहीं बल्कि पानी से विद्युत उत्पादन पर है जो सांविधानिक दायरे के भीतर बनाया गया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता कंपनियों के पक्ष में 26 अप्रैल 2016 को जारी अंतरिम रिलीफ आर्डर को भी निरस्त कर दिया। जिसमें राज्य सरकार ने इन कंपनियों को  विद्युत उत्पादन जल कर की करोड़ों रुपये के बकाये की वसूली हेतु नोटिस दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed