{"_id":"60fba46d8ebc3e5843066b8c","slug":"uttarakhand-high-court-says-petitioner-should-present-counter-affidavit-in-slaughter-house-complete-closure-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड: स्लॉटर हाउस पूर्ण रूप से बंद करने के मामले में प्रति शपथपत्र पेश करे याचिकाकर्ता- हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड: स्लॉटर हाउस पूर्ण रूप से बंद करने के मामले में प्रति शपथपत्र पेश करे याचिकाकर्ता- हाईकोर्ट
Sat, 24 Jul 2021 10:57 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 24 Jul 2021 10:57 AM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
विज्ञापन
नैनीताल हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले में सरकार की ओर से स्लॉटर हाउसों को संपूर्ण रूप से बंद करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को तीन सप्ताह में प्रति शपथपत्र पेश करने के लिए कहा है।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार मंगलौर निवासी इफ्तिकार और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने मार्च 2021 में शासनादेश जारी कर हरिद्वार जिले में स्लॉटर हाउस पूर्ण रूप से बंद कर दिए जबकि पहले धार्मिक स्थलों तक ही यह आदेश लागू था।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया कि सरकार धार्मिक क्षेत्रों में मांस की बिक्री प्रतिबंधित कर सकती है लेकिन पूरे जिले में स्लॉटर हाउसों को बंद नहीं कर सकती है। यह उनका सांविधानिक अधिकार है। सरकार का यह आदेश अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने वाला है। याचिकाकर्ता ने 21 जुलाई को बकरीद को देखते हुए स्लॉटर हाउसों को बंद करने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। संवाद
विज्ञापन
बीमा राशि पेंशन से काटने के मामले में सुनवाई 2 को
हाइकोर्ट ने राज्य के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से स्वास्थ्य बीमे की राशि काटने के मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 अगस्त की तिथि नियत की है। मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी गणपत सिंह बिष्ट और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य बीमा के नाम पर उनकी सहमति के बिना पेंशन से 1 जनवरी 2021 से अनिवार्य कटौती शुरू की है।
पेंशन उनकी व्यक्तिगत आय है और सरकार इसमें कटौती नहीं कर सकती है। याचिका में कहा गया कि पूर्व में यह व्यवस्था थी कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमे का खर्च सरकार खुद वहन करती थी लेकिन अब सरकार उनकी पेंशन से बीमे के नाम पर हर माह राशि काट रही है। याचिका में इस संबंध में जारी पूर्व व्यवस्था को बहाल करने की मांग की गई है। संवाद
हरिद्वार पंचायत चुनाव मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने दाखिल किया जवाब
हरिद्वार पंचायत चुनाव मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इसमें आयोग ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने के साथ परिसीमन कर दिया गया है और अब सरकार को चुनाव की अधिसूचना जारी करनी है। इसके लिए जल्द पत्र राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि 17 दिसंबर 2019 में ही सरकार को पत्र लिखा गया था कि परिसीमन और मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाए। इसके बाद 8 मार्च 2021 को परिसीमन किया गया। राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा कि कोविड कर्फ्यू के चलते कुछ समय कार्य नहीं हो सका लेकिन 23 जून को कर्फ्यू में छूट मिलते ही काम को आगे बढ़ाया गया।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी शमशेर अली ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकार की ओर से प्रशासकों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए जल्द पंचायत चुनाव कराने की मांग की है। याचिका में कहा गया कि हरिद्वार में पंचायत चुनाव अप्रैल 2021 में होने थे लेकिन कोरोना के चलते सरकार ने हरिद्वार में प्रशासकों की नियुक्ति कर दी। पूर्व में कोर्ट ने इस संबंध में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के आदेश के क्रम में राज्य निर्वावन आयोग ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है।