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एनआइटी मामले में हाईकोर्ट ने बरती सख्ती, सरकार के खिलाफ अवमामना याचिका दायर करने के निर्देश

Thu, 25 Apr 2019 10:29 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 25 Apr 2019 10:29 PM IST
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Uttarakhand high court Order for take action against government

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने श्रीनगर एनआइटी मामले में आदेश की अवमानना करने पर राज्य सरकार पर कार्यवाही शुरू करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए 27 मार्च को पहाड़ अथवा मैदान में कैंपस बनाने के लिए चार जगह चिन्हित कर न्यायालय को बताने का आदेश दिया था।

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इसके बावजूद इस मामले में कोई कार्यावाही नहीं हुई। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की सुस्ती के चलते इतने महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित संस्थान को उत्तराखंड से बाहर ले जाया जा सकता है।
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कोर्ट ने इस मामले में सरकार के खिलाफ याचिकाकर्ता को अवमामना की याचिका दायर करने को कहा है।  न्यायालय ने इस प्रकरण में ढिलाई के लिए केंद्र और राज्य सरकार को भी फटकार लगाई । कोर्ट ने पूर्व में नए छात्रों के प्रवेश के बारे में पूछते हुए 24 अप्रैल तक पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में से चार स्थानों को चयनित कर न्यायालय को सूचित करने को कहा था।

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बता दें कि याची जसवीर का कहना था कि एनआईटी को हाइवे के किनारे स्थापित किया गया है। इससे कई छात्र तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ रहे हैं। संस्थान का अपना परिसर नहीं है और सरकार की उपेक्षा का ही सबब है कि संस्थान में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को जयपुर एनआईटी में प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।

पूर्व में इसी मामले में श्रीनगर के सुमाड़ी, नियाल सहित अन्य गांवों के लोगों ने पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। इनका कहना था कि संस्थान के लिए उन्होंने अपनी जमीन दान में दी और अब सरकार इस संस्थान को मैदान में ले जाने का प्रयास कर रही है। इसी पर पूर्व में कोर्ट ने कहा था कि सरकार का यही हाल रहा तो यह संस्थान उत्तराखंड के हाथ से निकल जाएगा।

एनआईटी कैंपस में नहीं होगा बदलाव
प्रदेश सरकार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) कैंपस पहाड़ से उतारने के लिए सहमत नहीं है। सरकार ने श्रीनगर के पास सुमाड़ी में प्रस्तावित स्थल का कंटूर सर्वेक्षण कर डेढ़ सौ एकड़ भूमि को भवन निर्माण के लिए उपयुक्त पाया है।

चिह्नित भूमि के जिस हिस्से को निर्माण योग्य नहीं पाया गया, वहां पौधरोपण और सुंदरीकरण का कार्य किया जाएगा। इसके अलावा संस्थान को रेशम विभाग की भूमि भी आवंटित कर दी गई है। सरकार हाईकोर्ट में सर्वेक्षण रिपोर्ट के साथ भूमि और निर्माण संबंधित अन्य दस्तावेज दाखिल करेगी। 

एनआईटी कैंपस को लेकर चल रहा विवाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। बीते वर्ष एक छात्रा के नेशनल हाईवे पार करते समय सड़क हादसे की चपेट में आने के बाद संस्थान के नौ सौ स्टूडेंट ने कैंपस शिफ्ट करने को लेकर आंदोलन चलाया था। छात्रों ने मौजूदा पॉलीटेक्निक और आईटीआई परिसर में संचालित हो रहीं क्लासेज का विरोध जताया। एक साथ सभी छात्रों के कैंपस छोड़ने पर मामला मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंच गया।

एचआरडी ने दिसंबर में प्रथम, द्वितीय और तीसरे वर्ष के लगभग छह सौ छात्रों को जयपुर एनआईटी कैंपस में शिफ्ट कर दिया, जबकि चतुर्थ वर्ष और स्नातकोतर छात्रों को श्रीनगर कैंपस में ही रखा गया। इसके बाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई, जिसपर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के अनुसार कंटूर सर्वेक्षण की प्रारंभिक रिपोर्ट और भूमि संबंधित रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी जाएगी।

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