सरकारी धन के दुरुपयोग मामले में हाईकोर्ट ने बरती सख्ती, एक महीने में ब्याज का भुगतान करने के निर्देश
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हाईकोर्ट ने इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के नाम पर दक्षिण अफ्रीका के टूर के लिए दिए गए 20 लाख रुपये में से बचे 13 लाख का 2006 से लेकर 20012 तक का ब्याज 12 प्रतिशत की दर से एक माह के भीतर जमा करने के निर्देश दिए हैं।
ये निर्देश तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक (पीसीसीएफ) डीबीएस खाती और लेजर होटल के मालिक को दिए गए हैं। कांग्रेस के शासनकाल 2006 में दक्षिण अफ्रीका जाने के नाम पर लाखों रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग के इस मामले में अदालत ने जमा की गई धनराशि के संबंध में शपथपत्र कोर्ट में पेश करने को भी कहा है। अब अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता जय प्रकाश डबराल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2006 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नवप्रभात, विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल, तीन वन अधिकारियों और कई अन्य लोगों ने साउथ अफ्रीका जाने के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है।
याचिकाकर्ता की ओर से मामले की जांच सीबीआई से कराने मांग की गई थी। इस टूर के लिए वन विभाग ने 20 लाख रुपये दिए। इसमें से करीब सात लाख रुपये खर्च हुए और 13 लाख रुपये शेष दिखाए गए। यह राशि अलग-अलग किस्तों में 2012 तक जमा हुई। कोर्ट ने इस अवधि का ब्याज एक माह के भीतर जमा करने के निर्देश तत्कालीन वन संरक्षक डीबीएस खाती व लेजर होटल के स्वामी को दिए।