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उत्तराखंड: आवास किराये की वसूली मामले में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों को हाईकोर्ट का नोटिस

Tue, 17 Sep 2019 08:28 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 17 Sep 2019 08:28 AM IST
सार

  • अध्यादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर हुई सुनवाई।
  • केंद्रीय मंत्री निशंक, जनरल बीसी खंडूड़ी और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को नोटिस।

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Uttarakhand High court Notice to Three former Chief Minister of uttarakhand in rent case
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हाईकोर्ट ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास किराया वसूली सहित अन्य सुविधाओं के लिए जारी अध्यादेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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न्यायालय ने पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, जनरल बीसी खंडूड़ी के साथ ही पूर्व सीएम और महाराष्ट्र के मौजूदा राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है। 
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की  सुनवाई हुई। देहरादून की स्वयं सेवी संस्था रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटलमेंट केंद्र (रूलक) ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकार की ओर से पारित अध्यादेश को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार का यह कदम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट की ओर से दिए गए वसूली के आदेश की अवहेलना है।

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सरकार को मिले राजस्व का दुरुपयोग करने का आरोप

याचिका में कहा कि सरकार ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर यह अध्यादेश जारी किया है और यह आदेश पूर्व मुख्यमंत्रियों को व्यक्तिगत लाभ और सेवा देने के लिए है। याचिका में कहा कि यह आम जनता से सरकार को मिले राजस्व का दुरुपयोग है। याचिका में अध्यादेश के निष्प्रभावी घोषित करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बहस के दौरान कहा कि अध्यादेश जारी करने में सरकार ने अपनी विधायी शक्ति का दुरुपयोग किया है। यहां तक कि प्रदेश के राज्यपाल के पास इस अध्यादेश को पारित करने का विधायी अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि यह कदम हाईकोर्ट के संबंधित मामले में दिए गए निर्णय के प्रभाव को समाप्त करने वाला है।

याची की ओर से कहा गया कि संबंधित पूर्व सीएम के पते उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। इसको देखते हुए जवाब के लिए नोटिस सरकार के माध्यम से भेजे जाने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने इसको स्वीकार कर लिया। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तिथि तय की है।

यह था मामला

पूर्व मुख्यमंत्रियों पर बाजार दर से करोड़ों का किराया बकाया था। इनमें से स्व. एनडी तिवारी पर 1.12 करोड़, भगत सिंह कोश्यारी पर 47.57 लाख, बीसी खंडूड़ी पर 46.95 लाख, रमेश पोखरियाल पर 41.64 लाख और विजय बहुगुणा पर 37.50 लाख बकाया था।

हाईकोर्ट ने सरकार को पूर्व मुख्यमंत्रियों से किराया वसूली के आदेश दिए थे। इस आदेश के बाद सरकार एक अध्यादेश ले आई जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सुविधाएं 31 मार्च 2019 तक मान्य रखीं गईं। यानी इस अवधि तक पूर्व मुख्यमंत्रियों पर कोई देनदारी नहीं बनी। इसी अध्यादेश को रूलक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

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