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उत्तराखंड: भाटी हत्याकांड में पूर्व सांसद डीपी यादव को हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत
Thu, 18 Mar 2021 08:38 PM IST
अलका त्यागी
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, नैनीताल
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 18 Mar 2021 08:38 PM IST
सार
- डीपी यादव और तीन अन्य की याचिका पर सुनवाई 6 अप्रैल को
- गाजियाबाद के विधायक महेंद्र भाटी हत्याकांड में मिली उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी है चारों अभियुक्तों ने
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
गाजियाबाद के विधायक महेंद्र भाटी की हत्या मामले में उम्रकैद की सजा पाए पूर्व सांसद डीपी यादव सहित तीन अन्य को कोई राहत न देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए छह अप्रैल की तिथि नियत की है। आरोपियों ने देहरादून की सीबीआई कोर्ट से उन्हें मिली उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार डीपी यादव, परनीत भाटी, करन यादव और पाल सिंह उर्फ लक्कड़ पाला ने 13 सितंबर 1992 को गाजियाबाद के विधायक महेंद्र भाटी की हत्या कर दी थी।
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15 फरवरी 2015 को देहरादून की सीबीआई अदालत ने चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सीबीआई अदालत के इस फैसले को चारों अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। चारों अभियुक्त इस वक्त जेल में है। किसी को भी हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली है।
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बता दें कि गाजियाबाद के ब्लॉक प्रमुख रहे महेंद्र सिंह भाटी के सहयोग से डीपी यादव ने 1970 में शराब का कारोबार शुरू किया था। यादव के खिलाफ पहला आपराधिक मामला 1979 में गाजियाबाद के कविनगर थाने में दर्ज किया गया।
उसके बाद डीपी यादव की क्राइम कुंडली लंबी होती चली गई। हत्या के प्रयास के तीन, डकैती के दो, अपहरण और फिरौती के कई मामलों समेत, उत्पादन शुल्क एक्ट के तहत भी मामले दर्ज हुए। यही नहीं, उस पर गैंगस्टर, आतंकी और विघटनकारी गतिविधियों के मामले में भी केस दर्ज हुए।
उसके खिलाफ गाजियाबाद, मोदीनगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, बदायूं समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। इसके साथ ही हरियाणा के जींद और सिरसा में भी उसका खौफ बढ़ा।