फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand High Court Gives Permission for Self Advocacy to IFS Sanjeev Chaturvedi

उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने आईएफएस संजीव चतुर्वेदी को दी खुद पैरवी करने की अनुमति

Tue, 28 Sep 2021 11:43 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 28 Sep 2021 11:43 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं के प्रति की गई संजीव चतुर्वेदी की टिप्पणी को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा कि रिकॉर्ड को देखने से स्पष्ट है कि चतुर्वेदी एक कठिन कार्य का सामना कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने कई मौकों पर एक व्हिसल ब्लोअर के रूप में काम किया है।

विज्ञापन
Uttarakhand High Court Gives Permission for Self Advocacy to IFS Sanjeev Chaturvedi
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने वन अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को उनके एक मामले में खुद ही पैरवी करने की अनुमति दी है। वनाधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी कि उन्हें अपने मामले की स्वयं पैरवी करने की अनुमति जी जाए क्योंकि उन्हें उत्तराखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं पर विश्वास नहीं है। हाईकोर्ट ने उन्हें खुद ही मामले की पैरवी करने की अनुमति देते हुए सुनवाई के लिए 23 अक्तूबर की तिथि नियत की है। 

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने अधिवक्ताओं के प्रति की गई संजीव चतुर्वेदी की टिप्पणी को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा कि रिकॉर्ड को देखने से स्पष्ट है कि चतुर्वेदी एक कठिन कार्य का सामना कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने कई मौकों पर एक व्हिसल ब्लोअर के रूप में काम किया है। प्रथम दृष्टया, यह भी लगता है कि वह कई विवादों में उलझे हुए हैं और कई मंचों के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखते हैं और हल करने का प्रयास करते रहे हैं। कानून के उनके ज्ञान, उनके विद्वतापूर्ण तर्क, विश्लेषण और तथ्यों की कुछ कानूनी मंचों ने सराहना भी की है लेकिन एक वादी का यह दावा करना कि उसे बार के सदस्यों पर विश्वास नहीं है, दुखद है। संभवतया यह चतुर्वेदी की एक गलतधारणा है जो बार और कानूनी बिरादरी के विद्वान सदस्यों को थोड़ा आत्मनिरीक्षण करने के लिए मजबूर करती है। हालांकि चतुर्वेदी का मत यह भी है कि वह अपने वकील को मुसीबत में नहीं डालना चाहते।
विज्ञापन


हाल में उन्होंने हाईकोर्ट में ‘हाईकोर्ट ऑफ उत्तराखंड, पार्टी इन पर्सन रूल्स 2020’ के तहत अपने मामले की पैरवी स्वयं करने का प्रार्थना पत्र दिया था। इसकी सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने चतुर्वेदी से पूछा कि उन्होंने पहले से ही सीनियर और जूनियर अधिवक्ता नियुक्त किए हैं तो अब इन पर्सन क्यों आना चाहते हैं। इसके जवाब में चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें उत्तराखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं पर विश्वास नहीं है, इसलिये वह स्वयं पैरवी की अनुमति चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह कैट के अलावा दिल्ली हाईकोर्ट, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट सहित सुप्रीम कोर्ट में भी अपने मामले की स्वयं पैरवी कर रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह है मामला
वनाधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्ति में गड़बड़ी को लेकर कैट में याचिका दायर की थी। इस पर कैट की नैनीताल सर्किट बेंच सुनवाई कर रही थी। बाद में मामला कैट की दिल्ली पीठ को रेफर कर दिया गया था। इसे संजीव चतुर्वेदी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इस मामले की सुनवाई नैनीताल में ही करने की अपील की थी। पैरवी के लिए चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट में सीनियर और जूनियर अधिवक्ता नियुक्त किए थे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed