यहां 672 गांवों में लोगों को मिल रहा हर रोज सिर्फ 5 लीटर से भी कम पानी, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
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पर्वतीय जिलों में पानी की समस्या का मामला अब उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के पत्र को एक जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि हर व्यक्ति को पानी मिलना चाहिए। कोर्ट में सरकार का जवाब भी चौंकाने वाला रहा।
सरकार के बताया कि प्रदेश के 672 गांवों में पांच लीटर प्रति व्यक्ति से कम पेयजल उपलब्ध हो पा रहा है। कोर्ट ने सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश देते हुए सात जनवरी को सुनवाई करना तय किया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने सोमवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सुनवाई की।
याचिका में कहा गया कि अल्मोड़ा और बागेश्वर में महिलाएं दूर से पानी लाकर गुजारा कर रही हैं। पहाड़ी जिलों में ये समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि राज्य में 40 लीटर प्रति व्यक्ति पानी दिया जा रहा है।
672 गांवों में पांच लीटर से कम प्रति व्यक्ति पानी मिल रहा है। कोर्ट ने सरकार को प्रदेश के 672 गांवों में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। सचिव ने अल्मोड़ा और बागेश्वर के दौरे के दौरान इस समस्या को करीब से देखा था।