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उत्तराखंड: ऑनलाइन शॉपिंग के मामले में दायर याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, याचिकाकर्ता को दिया ये आदेश

Mon, 10 Aug 2020 11:00 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 10 Aug 2020 11:00 PM IST
सार

  • हाईकोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता केंद्र के पास दर्ज कराए शिकायत
  • कहा, केंद्र से शिकायत पर कार्रवाई न होने पर दोबारा दें याचिका

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Uttarakhand: High court dismisses petition filed in online shopping case
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट में आज ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। कंपनियों द्वारा उत्पाद कहां बना है, किस देश में बना है और उसकी मदर कंपनी किस देश की है, इसकी सही जानकारी प्रोडक्ट में नहीं दिखाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत केंद्र सरकार के पास दर्ज कराने को कहा है। 

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कोर्ट ने जनहित याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया है कि याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत केंद्र सरकार को नहीं भेजी थी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि अगर शिकायत पर केंद्र सरकार संबंधित कंपनी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करती है तो याचिकाकर्ता दोबारा याचिका दायर कर सकता है।
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सुनवाई के दौरान असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल राकेश थपलियाल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार के समक्ष अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नैनीताल निवासी अवनीश उपाध्याय ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ऑनलाइन शॉपिंग कराने वाली कंपनियां अमेजन, फ्लिपकार्ट, नायका ई रिटेल, स्नैपडील, अजीजो, लाइफ स्टाइटल इंटरनेशनल कंपनियों द्वारा ऑनलाइन शॉपिंग कराते वक्त प्रोडक्ट कहां बना है, किस देश मे बना है और उसकी मदर कंपनी किस देश की है, यह नहीं बताया जाता है।

इस कारण उपभोक्ता अपने को ठगा सा महसूस करता है। याचिका में कहा कि अगर उपभोक्ता प्रोडक्ट सही नहीं होने पर उसके खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत करना भी चाहता है तो वह भी नहीं कर सकता है, क्योंकि उसे कंपनी के नाम तक का पता ही नहीं होता है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव बिष्ट का कहना था कि इस संबंध में केंद्र सरकार ने 2011 में लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट बनाया था। 2018 में इस एक्ट को संशोधित भी किया था। इसमें कहा गया कि ऑनलाइन शॉपिंग कराने वाली कंपनियां प्रोडक्ट के साथ उसकी निर्मित अवधि, निर्मित क्षेत्र, संबंधित देश से जुड़ी सभी जानकारियां प्रोडक्ट के साथ देंगीं, लेकिन ये कंपनियां प्रोडक्ट से जुड़ी कोई जानकारी नहीं देती हैं।

याचिकाकर्ता का कहना था कि ऑनलाइन शॉपिंग कराने वाली कंपनियां प्रोडक्ट के साथ उससे जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध कराएं। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका को निरस्त करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता चाहे तो अपनी शिकायत केंद्र सरकार को दर्ज करा सकते हैं।

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