उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव औलख पर तय किए अवमानना के आरोप, जानिए पूरा मामला...
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शिक्षा विभाग में ठेके पर नियुक्त छह कंप्यूटर ऑपरेटरों को 11 मार्च 2005 के जीओ के तहत महंगाई भत्ता और अन्य देयकों का भुगतान नहीं करने पर हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव भूपेंद्र कौर औलख पर कोर्ट की अवमानना के आरोप तय कर दिए हैं।
अदालत ने पूर्व में जारी आदेशों का पालन न करने पर उन्हें 7 जनवरी 2019 को हाईकोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई हुई।
शिक्षा विभाग में ठेके पर नियुक्त काशीपुर निवासी सुभाष और पांच अन्य ने याचिका दायर कर कहा था कि सरकार की ओर से तय मानकों के अनुसार उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 11 मार्च 2005 को जारी अपने ही शासनादेश (जीओ) का उल्लंघन कर रही है।
7 जनवरी 2019 को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश
इस पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 10 जून 2013 को कंप्यूटर ऑपरेटरों को 11 मार्च 2005 के जीओ के तहत महंगाई भत्ता और अन्य देयकों का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इस पर सरकार ने स्पेशल अपील के जरिये एकलपीठ के आदेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी। खंडपीठ ने 10 जून 2016 को सरकार की स्पेशल अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। सात जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका को खारिज कर दिया।
इसी दौरान हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए शासन से जवाब मांगा। इसी के तहत शिक्षा सचिव सोमवार को हाईकोर्ट में पेश हुईं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं को जीओ के आधार पर भुगतान नहीं किया जा सकता है। इस जवाब से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव भूपेंद्र कौर औलख पर अवमानना के आरोप तय कर दिए और उन्हें 7 जनवरी 2019 को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए।