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Uttarakhand High Court: कॉर्बेट के निदेशक व अन्य के विरुद्ध निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक
Tue, 15 Nov 2022 07:52 PM IST
अलका त्यागी
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 15 Nov 2022 07:52 PM IST
सार
दरअसल, आईएफएस धीरज पांडे व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसको तत्कालीन डीजीपी बीएस सिद्धू पर 20 नवंबर 2012 को गांव बीरगीरवाली देहरादून में मौजूद लगभग 7450 वर्ग मीटर आरक्षित वन भूमि को फर्जीवाड़ा कर नाथू राम से खरीदने का आरोप लगाया था।
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नैनीताल हाईकोर्ट
- फोटो : PTI
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू की ओर से मसूरी के पूर्व डीएफओ व वतर्मान में कॉर्बेट नेशनल पार्क के निदेशक डॉ. धीरज पांडे व अन्य वन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराए मुकदमे में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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दरअसल, आईएफएस धीरज पांडे व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसको तत्कालीन डीजीपी बीएस सिद्धू पर 20 नवंबर 2012 को गांव बीरगीरवाली देहरादून में मौजूद लगभग 7450 वर्ग मीटर आरक्षित वन भूमि को फर्जीवाड़ा कर नाथू राम से खरीदने का आरोप लगाया था। साथ ही पूर्व डीजीपी पर वन अधिकारियों के खिलाफ बदले की भावना से नौ जुलाई 2013 को मुकदमा दर्ज कराने का भी आरोप लगाया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून ने 21 अक्तूबर 2022 को वन अधिकारियों को समन जारी किया।
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सुनवाई के दौरान वन अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि सिद्धू ने अधिकारियों पर दबाव बनाकर फर्जी तरीके से आरक्षित वन भूमि खरीदी और पेड़ों का कटान किया। 10 अप्रैल 2013 का कोर्ट में वह पत्र भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें तत्कालीन डीजीपी सत्यव्रत ने जांच के बाद धोखाधड़ी की संभावना जताते हुए सरकार को सिद्धू के खिलाफ सिफारिश की थी। साथ ही 18 अप्रैल 1970 को भूमि का विधिवत अभिलेखन कर आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किए जाने का पत्र भी पेश किया गया। इसके बाद सिद्धू पर धारा 166, 167, 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
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वन अधिकारियों की ओर से एकलपीठ के समक्ष तर्क दिया गया कि पूर्व डीजीपी ने अपने आधिकारिक अधिकार का दुरुपयोग कर वन अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए झूठा मामला दर्ज कराया। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने वन अधिकारियों के खिलाफ जारी समन आदेश व निचली कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी।