उत्तराखंड: पंचायत चुनाव में दो बच्चों और शैक्षिक शर्त पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
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पंचायती राज एक्ट में किए गए संशोधन के खिलाफ याचिका दायर करने वालों ने हाईकोर्ट के निर्देश पर शुक्रवार को अदालत में अपने बच्चों का ब्योरा शपथ पत्र के साथ पेश किया और बताया कि संशोधन के चलते वह चुनाव से बाहर हो रहे हैं। अदालत ने पंचायत चुनाव में प्रत्याशी के लिए दो बच्चों और शैक्षिक शर्त पर राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार को दस दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष ग्राम प्रधान संगठन, नयागांव कोटाबाग निवासी मनोहर लाल आर्य, हिमांशु पांडे, कुंदन सिंह, रितेश जोशी, परवीन कुमार, सुरेश आर्य की याचिका पर सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने 2019 में पंचायती राज एक्ट में संशोधन किया है। इसके तहत दो बच्चों से अधिक वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है, जो गलत है। सरकार एक्ट के बदलाव को बैक डेट से लागू कर रही है, जो नियम विरुद्ध है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि एक्ट को लागू करने के लिए 300 दिन का समय दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना था कि दो बच्चों से अधिक बच्चों वालों के चुनाव लड़ने पर रोक से पहाड़ी क्षेत्रों में प्रधान के उम्मीदवार मिलना मुश्किल हो जाएगा।
याचिका में शैक्षिक शर्त (हाईस्कूल पास) को भी चुनौती दी गई है। एक्ट के संशोधन में ये भी कहा गया है कि कोऑपरेटिव सोसायटी के सदस्य भी दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव नही लड़ सकते हैं। गांव में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी कोऑपरेटिव सोसायटी का सदस्य होता है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को दस दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
सरकार इन मुद्दों पर देगी जवाब
हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में प्रत्याशी के लिए दो बच्चों की सीमा और सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए पंचायत में किसी भी स्तर का चुनाव लड़ने के लिए दसवीं और एससी-एसटी के लिए आठवीं तक की शिक्षा अनिवार्य किए जाने पर जवाब मांगा है।
ओबीसी के लिए कोई प्राविधान नहीं करने के औचित्य को भी बताने के निर्देश दिए हैं। को-ऑपरेटिव सोसायटी के सदस्य के चुनाव लड़ने पर पाबंदी और उप प्रधान के चुनाव के बजाय मनोनयन जैसे प्रावधान पर भी स्पष्टीकरण देने के कहा। अदालत ने नया प्रावधान लागू करने के लिए 300 दिन की मोहलत नहीं दिए जाने को लेकर भी जानकारी मांगी है।