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उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा, ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारे में अरदास के लिए लोगों को क्यों रोका जा रहा?

Tue, 23 Jun 2020 10:02 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 23 Jun 2020 10:02 PM IST
सार

  • हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार से चार सप्ताह में मांगा जवाब

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Uttarakhand High court Ask Government Why Ban on Ardad in Har Ki pauri Gyan Godri Gurdwara
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट में आज हरिद्वार में हरकी पैड़ी स्थित ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारा में लंबे समय से शासन-प्रशासन की ओर से अरदास पर रोक लगाए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि वह बताए किन कारणों से गुरुद्वारे में लोगों को अरदास करने से रोका जा रहा है।

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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार ऋषिकेश निवासी जगजीत सिंह और हरिद्वार निवासी सुब्बा सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारा सिखों का पवित्र धार्मिक स्थल है, जिसमें श्री गुरुनानक देव जी ने उपदेश दिए थे लेकिन लंबे समय से शासन-प्रशासन ने वहां अरदास करने पर रोक लगा रखी है जो गलत है।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से गुरुद्वारे में अरदास की अनुमति प्रदान किए जाने की प्रार्थना की गई थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को इस संबंध में चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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हरकी पैड़ी के पास वाली नहर का नाम गंगा नदी रखने की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

हाईकोर्ट ने हर की पैड़ी हरिद्वार के निकट से निकलने वाली नहर का नाम गंगा नदी रखने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज करते हुए सरकार को इस संबंध में कानून के मुताबिक निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी अनमोल वशिष्ठ ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर हर की पैड़ी के अगले चैनल से निकलने वाली नहर का नाम गंगा नदी रखे जाने की अपील की थी।

कोर्ट ने कहा कि यह मामला याचिकाकर्ता के विधिक अधिकारों से जुड़ा नहीं है। इसलिए इस मामले में सरकार को किसी तरह के दिशा निर्देश नहीं दिए जा सकते। कोर्ट ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो नहर का नाम विधि अनुसार परिवर्तन करने पर विचार कर सकती है।

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