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उत्तराखंड: यहां 34 साल बाद हुई भारी बर्फबारी, वैज्ञानिकों ने बताई ये वजह
Sun, 15 Dec 2019 10:38 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
रमेश चंद्र जोशी, अमर उजाला, थराली
रमेश चंद्र जोशी, अमर उजाला, थराली
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 15 Dec 2019 10:38 AM IST
सार
- अभी तक दिसंबर माह के अंत में पड़ती थी बर्फ
- वैज्ञानिकों का कहना, ग्लोबल वार्मिंग का है असर
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मौसम पर ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव ही है कि 15 दिसंबर से पहले इतनी भारी बर्फबारी हुई है। करीब 34 साल बाद ऐसा मौका आया है कि पौष माह आने से पहले ही मार्गशीष में इतनी भारी बर्फबारी देखने को मिली है।
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बमोटिया गांव के दयाल राम का कहना है कि 1985-86 में मार्गशीष में इतनी भारी बर्फबारी हुई थी। पहली बार 15 दिसंबर से पहले बर्फबारी के चलते ग्रामीण भी हैरत में हैं। आमतौर पर तीन हजार मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिसंबर माह के अंत से फरवरी तक ही बर्फबारी होती थी।
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तापमान लगातार कम होने से दिसंबर के पहले ही पखवाड़े में काफी बर्फबारी
ग्वालदम में 1980 से दुकान चलाने वाले केदारदत्त ने कहा कि आमतौर पर यहां पर 25 दिसंबर के बाद से जनवरी के बीच में बर्फबारी होती थी लेकिन इस बार समय से पहले ही इतनी बर्फबारी हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. अनिल चंद्रा का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम में ऐसा बदलाव आया है।
इस बार बरसात देर तक रही, जिससे तापमान कम रहा। उसके बाद अक्तूबर और नवंबर माह में दो बार बारिश के कारण भूमि में काफी नमी थी, जिससे तापमान लगातार कम होने से दिसंबर के पहले ही पखवाड़े में काफी बर्फबारी हुई है।
इस बार बरसात देर तक रही, जिससे तापमान कम रहा। उसके बाद अक्तूबर और नवंबर माह में दो बार बारिश के कारण भूमि में काफी नमी थी, जिससे तापमान लगातार कम होने से दिसंबर के पहले ही पखवाड़े में काफी बर्फबारी हुई है।