उत्तराखंड: हरक सिंह बोले- सीएम, बोर्ड अध्यक्ष, मंत्री या राज्य मंत्री को नहीं सचिव को हटाने का अधिकार
- हरक सिंह ने कहा-वर्तमान बोर्ड अध्यक्ष ने अज्ञानता में उठाया कदम
- बोर्ड के पास ही हैं सारे अधिकार, प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
- सदस्यों के बरकरार रहने का दावा, जल्द लिख कर जताएंगे विरोध
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मंत्री हरक सिंह ने भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव पद से दमयंती रावत को हटाने के तरीके पर सवाल उठाया है। हरक का कहना है कि बोर्ड की नियमावली के तहत किसी को हटाने की खास प्रक्रिया है। अज्ञानता या अन्य कारण से वर्तमान बोर्ड अध्यक्ष ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया। हरक ने यह भी कहा कि बोर्ड के सदस्य अभी बरकरार हैं।
बोर्ड के पुनर्गठन से नाराज हरक सिंह बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मिले थे। रावत ने इस मुलाकात के बाद कहा था कि उनकी बात पूरी नहीं हो पाई है और अब दोबारा मुलाकात के बाद वे इस पर कुछ कहेंगे।
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शुक्रवार को भी हरक सिंह ने इस मामले में बोर्ड के पुनर्गठन और सचिव पद से दमयंती रावत को हटाए जाने पर ही सवाल खड़ा कर दिया। हरक ने कहा कि बोर्ड के अध्यक्ष को असीमित अधिकार हैं, लेकिन अध्यक्ष को एक प्रक्रिया का पालन भी करना होता है। दमयंती को हटाने में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
श्रम मंत्री ने बोर्ड के सदस्यों को हटाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि बोर्ड के सदस्य उन्हें लिखकर देने वाले हैं। बोर्ड के सदस्य सरकार की ओर से नामित हैं। बोर्ड की 2005 की नियमावली साफ कहती है कि जब तक नए सदस्य नियुक्त नहीं होते हैं तब तक पूर्व के सदस्य अपने पद पर बने रहेंगे। बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल वैसे भी चार साल का है।
बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष को भी लिया निशाने पर
श्रम मंत्री ने बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष सत्याल को भी निशाने पर लिया। हरक सिंह ने कहा कि वर्तमान बोर्ड के अध्यक्ष की अज्ञानता ही है कि उन्होंने बिना प्रक्रिया अपनाए दमयंती रावत को सचिव पद से हटाया। पूर्व में बोर्ड ने बैठक कर प्रस्ताव पारित किया था और श्रम मंत्री के अनुमोदन के बाद शासन ने उन्हें बोर्ड का सचिव बनाया था। उन्हें पद से मुख्यमंत्री, शासन या बोर्ड अध्यक्ष नहीं हटा सकता।
कैबिनेट का दिया उदाहरण
श्रम मंत्री ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए कैबिनेट का उदाहरण दिया। हरक ने कहा कि मुख्यमंत्री को असीमित अधिकार हैं, लेकिन किसी प्रस्ताव के लिए उन्हें कैबिनेट की प्रक्रिया से गुजरना ही होता है। हरक सिंह ने दावा किया कि उन्होंने यह बात मुख्यमंत्री से भी कही है।