{"_id":"dba780366d66558081933bac0390ff59","slug":"uttarakhand-governor-on-politician","type":"story","status":"publish","title_hn":"'एमएलए और एमपी बन गए हैं ‘ऊंची जात’ वाले'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'एमएलए और एमपी बन गए हैं ‘ऊंची जात’ वाले'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 08 Mar 2014 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है। 70 प्रतिशत से अधिक आबादी आज भी पर्वतीय अंचलों में रहती है, लेकिन एमपी, एमएलए, नेता और अफसर बनकर ‘ऊंची जात’ हासिल कर चुके लोगों को उनका दर्द नजर नहीं आता। उनकी निगाहें सिर्फ देहरादून, मसूरी और नैनीताल जैसे पहले से विकसित क्षेत्रों पर ही रहती है।
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कुछ इन लफ्जों में राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने पहाड़ पर विकास की अनदेखी पर चिंता जाहिर की।
महिला एसोसिएशन के कार्यक्रम में बोले
शनिवार को उत्तरांचल महिला एसोसिएशन (उमा) की ओर से राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड का 90 प्रतिशत भूभाग पर्वतीय क्षेत्र है।
विज्ञापन
पढ़ें, बदरीनाथ धाम में पहननी होगी धोती, मोबाइल बैन
विज्ञापन
मैदानों में सौ शिक्षकों की जरूरत के विपरीत चार सौ शिक्षक तैनात हैं, जबकि पहाड़ों पर स्कूलों में शिक्षक हैं ही नहीं। पहाड़ पर 50 डाक्टरों की जगह दो चिकित्सक तैनात रहते हैं। ऐसे में पहाड़ी के बच्चे सीखें तो क्या और रोगी जाएं तो कहां।
पहाड़ों पर ध्याने दें जनप्रतिनिधि
राज्यपाल ने कहा कि पहाड़ के दूरदराज के क्षेत्र विकास से कोसों दूर हैं। ऐस में अगर वह कभी पहाड़ पर जाएं और कोई महिला या बच्चा उनसे पूछे कि आजादी के इतने साल बाद भी यह हाल क्यों है तो वह कोई जवाब नहीं दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों को इस दिशा में सोचकर विकास की पहल करनी चाहिए।