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Uttarakhand: सरकारी स्कूल के बच्चे पढ़ेंगे राज्य आंदोलन का इतिहास, 'हमारी विरासत और विभूतियां' पुस्तक तैयार

Wed, 22 May 2024 10:57 AM IST
रेनू सकलानी बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो , देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो , देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 22 May 2024 10:57 AM IST
सार

एससीईआरटी ने की 'हमारी विरासत और विभूतियां'  पुस्तक तैयार की है। सीएम ने वर्ष 2022 में ऐसी पुस्तक तैयार करने की घोषणा की थी।

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Uttarakhand government schools Children will read the history of the statehood movement
सीएम धामी ( फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विस्तार

उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में प्रारंभिक कक्षाओं के बच्चे राज्य आंदोलन के इतिहास के साथ ही कारगिल के अमर शहीदों के बलिदान को पढ़ेंगे। सीएम की घोषणा के बाद राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने हमारी विरासत और विभूतियां पुस्तक तैयार की है, जिसे कक्षा छह से आठ तक सामाजिक विज्ञान विषय की सहायक पुस्तिका के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

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शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी की अध्यक्षता में हुई विभाग की बैठक में इसका प्रस्तुतीकरण किया गया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक वंदना गर्ब्याल ने बताया, बाल साहित्य के रूप में इस पुस्तक को तैयार किया गया है। इसके माध्यम से छात्र-छात्राओं को राज्य में स्थित झील, झरने, वेशभूषा, खानपान और अपनी संस्कृति की जानकारी मिलेगी।

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कई महान विभूतियों के बारे में पढ़ेंगे
प्रारंभिक कक्षाओं में छात्र-छात्राएं श्रीदेव सुमन, तीलू रौतेली समेत कई महान विभूतियों के बारे में पढ़ेंगे। वहीं, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी यह पुस्तक एक आधार बनेगी। इस पुस्तक के माध्यम से बच्चों को चौंदकोट जनशक्ति मार्ग की गाथा भी पढ़ने को मिलेगी। पुस्तक निर्माण में समन्वयक सुनील भट्ट बताते हैं कि पौड़ी जिले में 33 किमी का यह मार्ग सामुदायिक सहभागिता और श्रमदान का बड़ा उदाहरण है।

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इसके अलावा 1951 में टिहरी जिले के बूढ़ाकेदार की साझा चूल्हे की कहानी भी पढ़ने को मिलेगी। जिसमें धर्मानंद नौटियाल, बाहदुर सिंह राणा और भरपूर नगवाण तीनों ने एक साथ रहकर सामाजिक समरसता का बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया था।

भगवान राम का उत्तराखंड से जुड़ाव

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पुस्तक में भगवान राम का उत्तराखंड से जुड़ाव भी पढ़ने को मिलेगा। पुस्तक में गढ़वाल से कुमाऊं तक राम मंदिर और उनकी पूजा शैली की जानकारी दी गई है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के सितोंस्यू में माता सीता का मंदिर है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहां सीता माता ने भू समाधि ली थी।

राज्य की इन विभूतियों को पढ़ेंगे छात्र

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पुस्तक में छात्र राज्य की विभूतियों कालीकुमाऊं के क्रांतिकारी कालू मेहरा, वीरभड़ माधो सिंह भंडारी, पुरिया नैथानी, वीर केसरीचंद, सोबन सिंह जीना, मुंशी हरि प्रसाद टम्टा, खुशीराम आर्य, राज्य आंदोलनकारी हंसा धनाई व बेलमति चौहान, नागेंद्र सकलानी व मोली भरदारी, कारगिल शहीद मेजर राजेश अधिकारी, मेजर विवेक गुप्ता, अशोक चंद्र विजेता गजेंद्र सिंह बिष्ट, विपिन त्रिपाठी, रानी कर्णावती, टिनचरी माई, बद्रीदत्त पांडे, गिरीश तिवारी गिर्दा, गंगोत्री गर्ब्याल , महादानी जसोली सोकियाण, महाकवि चंद्रकुंवर बतर्वाल, कबूतरी देवी आदि।

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एससीईआरटी की ओर से कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं के लिए पुस्तक तैयार करने के बाद अब कक्षा नौ और 10वीं के छात्र-छात्राओं के लिए पुस्तक तैयार की जाएगी। -वंदना गर्ब्याल , निदेशक एससीईआरटी

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