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Exclusive: उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों का हाल...सामाजिक विषय के मास्टर पढ़ा रहे अंग्रेजी और गणित

Tue, 01 Aug 2023 12:20 PM IST
अलका त्यागी बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 01 Aug 2023 12:20 PM IST
सार

सर्व शिक्षा के जूनियर हाई स्कूलों में तीन सहायक अध्यापक के पद हैं, लेकिन स्कूलों में मानक के अनुसार शिक्षक न होने से 170 एकल शिक्षकों वाले इन स्कूलों में एक शिक्षक को 21 विषयों को पढ़ाना पड़ रहा है।

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Uttarakhand government school Teacher of social subjects are teaching English and Mathematics
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के जूनियर हाईस्कूलों में सामाजिक विषय के शिक्षक बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी और गणित पढ़ा रहे हैं। खासकर एकल शिक्षक वाले जूनियर स्कूलों में यह स्थिति बनी है। इस तरह के राज्य में इक्का दुक्का नहीं बल्कि 170 स्कूल हैं। वहीं तीन हजार प्राथमिक विद्यालयों में एक से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे एक ही कक्षा में पढ़ रहे हैं। शिक्षा विभाग का यह कोई मिक्स लर्निंग का अभिनव प्रयोग नहीं बल्कि स्कूलों में घट रही छात्र संख्या और शिक्षकों की कमी की वजह से यह समस्या बनी है।

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राज्य सेक्टर के जूनियर हाईस्कूलों में मानक के अनुसार चार सहायक अध्यापक और एक प्रधानाध्यापक होना चाहिए। जबकि सर्व शिक्षा के जूनियर हाई स्कूलों में तीन सहायक अध्यापक के पद हैं, लेकिन स्कूलों में मानक के अनुसार शिक्षक न होने से 170 एकल शिक्षकों वाले इन स्कूलों में एक शिक्षक को 21 विषयों को पढ़ाना पड़ रहा है।
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इसमें कुछ स्कूल देहरादून जिले के हैं। जिले के जूनियर हाईस्कूल रावना विकासखंड चकराता में पिछले तीन साल से एकमात्र शिक्षक है। सामाजिक विषय के शिक्षक प्रवीन चौधरी को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत व कला सभी विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं। यही स्थिति इसी ब्लॉक के जूनियर हाईस्कूल बिसऊ घणता की है।

स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे है, स्कूल के एकल शिक्षक संजीव दास का भी वर्ष 2016 में चकराता ब्लॉक से विकासनगर ब्लॉक के मदरसू स्कूल में तबादले का आदेश हुआ था, लेकिन रिलीवर न मिलने की वजह से शिक्षक नई तैनाती पर नहीं जा सके हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय मनटाड के शिक्षक मंगल के मुताबिक स्कूल में मात्र सात छात्र-छात्राएं हैं। कम छात्र होने की वजह से कक्षा एक से पांचवीं तक के सभी छात्र-छात्राएं एक कक्षा में पढ़ते हैं। विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून जिले में इस तरह के 72 स्कूल हैं।

इतने स्कूलों में एक ही कक्षा में पढ़ते हैं एक से पांचवीं तक के छात्र

प्रदेश का पिथौरागढ़ ऐसा जिला है, जिसमें एकल शिक्षक वाले सबसे अधिक प्राथमिक विद्यालय हैं। स्कूल में कम छात्र संख्या की वजह से एक से पांचवीं तक के छात्र एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। जिले में इस तरह के 486 स्कूल हैं। जबकि अल्मोड़ा में 442, बागेश्वर में 293, चमोली में 396, चंपावत में 135, हरिद्वार में 36, नैनीताल में 228, पौड़ी में 273, रुद्रप्रयाग में 221, टिहरी में 302, ऊधमसिंह नगर में 98 एवं प्राथमिक विद्यालय उत्तरकाशी में 208 स्कूल हैं।

शिक्षकों की भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की वजह से 2350 शिक्षकों की भर्ती रुकी हुई है। भर्ती होने पर स्कूलों में मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। जूनियर हाईस्कूलों में एक शिक्षक विभिन्न विषयों को पढ़ा लेते हैं।
- रामकृष्ण उनियाल, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा

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