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जनता ने उठाए DGP और उत्तराखंड सरकार पर सवाल
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 01 Feb 2016 10:51 AM IST
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डीजीपी बीएस सिद्धू के रवैये पर अमर उजाला ने पाठकों की राय क्या मांगी, लोगों की अंगुलियां सरकार पर उठ गईं।
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तमाम पाठकों ने सवाल उठाया कि आप डीजीपी को क्यों दोषी ठहराते हैं, इसकी असल जिम्मेदार तो सरकार है, जिसने भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद भी सिद्धू को डीजीपी के पद पर संभाल कर रखा है। एक पाठक ने बताया कि सीबीआई ने एक मामले में जांच की अनुमति चाही थी, राज्य सरकार ने दी ही नहीं, वरना डीजीपी की कहानी कब की खत्म हो गई होती।
कुछ पाठकों ने कहा कि अगर सही तरह से जांच करने वालों को सरकार परेशानी से नहीं बचा सकती तो इसमें परेशान करने वाले डीजीपी से ज्यादा जिम्मेदार तो सरकार है। हमारे लिए भी यह चौंकाने वाली घटना है कि अमर उजाला में प्रकाशित ‘जमीन की जांच की तो जमीन पर आ गए वर्दीवाले’ खबर पर लोगों ने अभूतपूर्व प्रतिक्रिया दी।
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इतना रोष किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ हो सकता है, समझ से बाहर है। कईयों ने सरकार से डीजीपी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। कई लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर पुलिस विभाग में जारी भ्रष्टाचार की कहानी भी उजागर की है।
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जिसे हम अपने स्तर पर पुख्ता करने के बाद ही आपके सामने लेकर आएंगे। जितनी बड़ी संख्या में आम शहरी, अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, राजनीति से जुड़े लोगों के फोन, मेल और व्हाट्सएप मैसेज आए, उन सबको प्रकाशित करना संभव नहीं है। कुछ चुनिंदा राय हम प्रकाशित कर रहे हैं...
डीजीपी बीएस सिद्धू के खिलाफ पिछले डेढ़ साल से न्यायिक लड़ाई लड़ रहा हूं। सीबीआई ने उनके खिलाफ जांच करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन राज्य सरकार ने मना कर दिया था। यदि उसी समय जांच हो जाती तो आज यह स्थिति ना होती। जिस पुलिस फोर्स के कंधों पर राज्य की सुरक्षा का जिम्मा है, उसका मुखिया एक दागी आईपीएस कैसे हो सकता है ? यह पहला राज्य है जहां चार्जशीटेड आईपीएस डीजीपी बना हुआ है। मैंने उच्च न्यायालय में रिट दाखिल की। एक साल से ज्यादा समय लगा, लेकिन न्याय नहीं मिला तो अब सर्वोच्च न्यायालय गया हूं। यह सब मैं इसलिए कर रहा हूं कि डीजीपी बीएस सिद्धू जिस तरह के अफसर हैं, उन्हें राज्य की जनता कभी स्वीकार नहीं कर सकती। इन्हें सरकार को तत्काल पद से हटाना चाहिए।
- रविंद्र जुगरान, भाजपा नेता
प्रदेश जनता का कल्याण करने के लिए बना है या जमीनों का कल्याण करने के लिए? यह सवाल मेरे जेहन में है जो अमर उजाला के माध्यम से प्रदेश के मुखिया से मैं जानना चाहता हूं। डीजीपी तो कठपुतली है। असली खिलाड़ी कौन है, यह सामने आना चाहिए। स्टर्डिया ज़मीन घोटाला, चाय बागान की जमीन पर नेताओं और अधिकारियों की गिद्ध दृष्टि, नैनीसार की जमीन को निजी हाथों में देना समेत कई ऐसे जमीनों के घपले हैं, जो सरकार के असली चेहरे को उजागर करता है। सरकार अगर ईमानदार है तो डीजीपी को बर्खास्त करें।
- अनूप नौटियाल, आम आदमी पार्टी
जो नत्थूराम 31/12/1983 को मर गया उस नत्थूराम से उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक ने 20/11/2012 को देहरादून जिले के मसूरी में 9 बीघा लगभग 8100 गज जमीन खरीद ली! नत्थूराम की मौत के 29 साल बाद, अब बड़ा और पहला सवाल यह है कि नत्थूराम धरती पर आया या डीजीपी रजिस्ट्री करवाने स्वर्ग गए?
- संजय भट्ट, केंद्रीय संयोजक, उत्तराखंड अगेस्ट करप्शन
डीजीपी के खिलाफ अभी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में मामला विचाराधीन है और यह सामान्य सिद्धांत है कि यदि किसी अधिकारी केविरुद्ध कोई जांच लंबित हो तो उसे मुख्य पद पर पदासीन नहीं किया जा सकता। प्रदेश सरकार को फौरन पुलिस महानिदेशक के पद पर बैठे बीएस सिद्धू को बर्खास्त करना चाहिए।
- जितेंद्र सिंह नेगी, अवैतनिक सचिव, महादेवी कन्या पाठशाला देहरादून
जिस व्यक्ति के हाथ में प्रदेश की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी हो, उस पर गंभीर आरोप होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी स्थिति में राज्य में सुदृढ़ कानून व्यवस्था और पुलिस बल में अनुशासन की बात बेइमानी है। इसका अंदाज उत्तराखंड में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों द्वारा चलाए गए मिशन आक्रोश से भी लगाया जा सकता है। यह बात समझ से परे है कि आरोपों से घिरे होने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने बीएस सिद्धू को पुलिस महकमे की कमान क्यों सौंपी है ? आरोपों के बावजूद सिद्दू कुर्सी पर काबिज हैं, तो इसका सीधा सा अर्थ है कि उन्हें सरकार व मुख्यमंत्री का पूरा संरक्षण प्राप्त है।
- अजेंद्र अजय, पूर्व उपाध्यक्ष, राज्य मीडिया सलाहकार समिति, उत्तराखंड सरकार
डीजीपी के बारे में जो भी लिखा गया है वो सत्य है। मैने भी इन बड़े अधिकारियों और माफियाओं के बीच की दोस्ती बहुत नजदीक से देखी है। ऐसे निरंकुश अधिकारियों के आगे हमारे नेता नतमस्तक होते हैं, क्योंकि इनसे अपना काम जो निकलवाना होता है। दूसरा इन ब्यूरोक्रेट्स का आप कुछ बिगाड़ भी नहीं सकते हैं। अब समय आ गया है कि इस भस्मासुरी नौकशाही को खत्म कर नया सिस्टम डेवलप किया जाए। माफिया, नेताओं और भ्रष्ट नौकरशाही के गठबंधन को तोड़ने के लिए पूर्व सैनिक राज्य व्यापी आंदोलन करेंगे।
- पीसी थपलियाल पूर्व सैनिक, अर्द्ध सैनिक संयुक्त संगठन