समान काम का समान वेतन मामले में उत्तराखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से नहीं राहत
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समान काम का समान वेतन के एक मामले में राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) दायर की। लेकिन सर्वोच्च न्यायलय ने उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश में दखल से मना कर दिया है। अलबत्ता उच्च न्यायालय से कहा कि वह याचिका का निस्तारण यथाशीघ्र कर दे। यह मामला लोक निर्माण विभाग में डॉटा एंट्री ऑपरेटर पद पर कार्यरत संजय कुमार जोशी का है। इनके मामले में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने उन्हें समान कार्य का समान वेतन देने काअंतरिम आदेश पारित किया था। इस अंतरिम आदेश के खिलाफ प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर रखी थी।
कब क्या हुआ
-लोनिवि में कनिष्ठ सहायक/ डॉटा इंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत संजय जोशी ने नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उन्हें पद के सापेक्ष न्यूनतम वेतन (समान कार्य का समान वेतन) देने की मांग की।
-दो मई 2017 को न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने जोशी को समान कार्य का समान वेतन देने के आदेश पारित किए। विभाग ने इस पर अमल नहीं किया।
-29 नवंबर 2017 न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ ने जोशी की अवमानना याचिका पर सरकार को कार्रवाई के आदेश दिए।
- राज्य सरकार की याचिका पर 12 अप्रैल 2018 को न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकल पीठ ने आदेश पारित किए जोशी न्यूनतम वेतन के दायरे में नहीं आएंगे।
-27 अप्रैल 2018 को इस आदेश के आलोक में कार्मिक विभाग ने विभागों में दैनिक वेतन, संविदा और आउटसोर्स पर तैनात कर्मियों के दिशा-निर्देश जारी कर नियमित और अस्थायी कर्मचारियों के बारे स्थिति साफ की।
13 जून 2018 को नैनीताल हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह और न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में संजय जोशी को न्यूनतम वेतन का हकदार माना।
-खंडपीठ के अंतरिम आदेश के खिलाफ सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका दायर(एसएलपी) की।
-01 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमआर शाह की खंडपीठ के नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ के अंतरिम आदेश में दखल देने से मना कर दिया। साथ उच्च न्यायालय से याचिका का यथाशीघ्र निस्तारण करने को कहा है।
हजारों कर्मचारियों पर असर डालेगा अंतिम फैसला
संजय जोशी बनाम प्रदेश सरकार के मामले पर विभागों में तैनात हजारों आउटसोर्स कर्मचारी, संविदा और दैनिक वेतन भोगियों की नजरें लगीं हैं। इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला समान कार्य का समान वेतन मामले में नजीर बन जाएगा।
संजय कुमार जोशी का विशेष प्रकरण है। इस मामले में अदालत ने अंतरिम आदेश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय को याचिका को यथाशीघ्र निस्तारित करने को कहा है। यदि याचिका निस्तारित नहीं होती है तब सरकार सर्वोच्च अदालत में जा सकती है।
- एडवोकेट अभिषेक अत्री, सर्वोच्च न्यायालय में उत्तराखंड सरकार के एडवोकेट ऑन रिकार्ड)