उत्तराखंड: ग्रामीण क्षेत्र के विकास को मिली तवज्जो, पलायन आयोग में नामित किए पांच सदस्य
उत्तराखंड में ग्राम्य विकास और पलायन आयोग में सरकार ने बृहस्पतिवार को पांच सदस्य नामित किए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुताबिक इससे पलायन आयोग बेहतर तरीके से काम कर पाएगा।
कोरोना काल से पहले प्रदेश में पलायन आयोग का फोकस रिवर्स पलायन पर था। लॉकडाउन के दौरान तीन लाख से अधिक प्रवासी वापस लौटे तो आयोग के लिए प्रवासियों को रोके रखना भी महत्वपूर्ण हो गया। इसी बीच कोरोना का एक सबक और मिला। प्रदेश सरकार ने महसूस किया कि ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
दरअसल, पलायन आयोग प्रदेश सरकार के इस दूसरे एजेंडे पर भी फोकस किए हुए है। यही वजह है कि आयोग की ओर से रिवर्स पलायन पर भी रिपोर्ट तैयार की गई और कृृषि सहित अन्य विभागों से भी लगातार बात की जा रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक पांच सदस्य नामित होने से आयोग अब बेहतर तरीके से काम कर पाएगा। राज्य में स्वरोजगार योजनाओं को लागू किया जा रहा है और इससे मदद मिलेगी।
बागेश्वर की रिपोर्ट तैयार, जल्द होगी जारी
आयोग की ओर से पलायन पर जिला स्तर की रिपोर्ट भी जारी की जा रही हैं। अब तक पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग सहित करीब छह से अधिक जिलों की रिपोर्ट जारी की जा चुकी है। आयोग के मुताबिक अब बागेश्वर की रिपोर्ट तैयार है और जल्द ही जारी की जाएगी।
नामित हुए सदस्य
- रामप्रकाश पैन्यूली, टिहरी गढ़वाल
- सुरेश सुयाल, रानीखेत
- दिनेश रावत, घंडियाल, पौड़ी
- अनिल शाही, अल्मोड़ा
- रंजना रावत, रुद्रप्रयाग
पांच सदस्यों के नामित होने से आयोग अब और बेहतर काम कर पाएगा। अधिकतर सदस्यों को मैं जानता हूं। उन्हें पहाड़ की समझ है। आयोग इस समय ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर भी काम कर रहा है और रिवर्स पलायन भी इसी का हिस्सा है।
- एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, पलायन एवं ग्राम्य विकास आयोग