'कभी भी गिर सकती है उत्तराखंड की सरकार'
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जी, हां उत्तराखंड की सरकार कभी भी गिर सकती है। ये दावा है नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी (भगतदा) का।
उन्होंने कहा है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में एक नए सूर्य का उदय हुआ है। उन्होंने पिथौरागढ़ समेत तमाम शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए केंद्रीय मदद दिलाने की बात कही।
कहा कि कांग्रेस के अंतर कलह के कारण प्रदेश सरकार कभी भी गिर सकती है। कहा जब एमएलए बेलगाम हों तो नौकरशाही पर कैसे अंकुश लगेगा।
भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में कोश्यारी ने सरकार के 100 दिन के कार्यकाल को सफल बताते हुए कहा कि मोदी स्वदेश और विदेश नीति में खरे उतरे हैं, प्रधानमंत्री की जापान, भूटान और नेपाल की कई मायनों में सफल रही है।
आज पूरा विश्व प्रधानमंत्री की ओर टकटकी लगाकर देख रहा है। पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही फायरिंग को देखते हुए प्रधानमंत्री ने पाक के साथ सचिव स्तर की वार्ता खत्म कर उसे कड़ा संदेश दिया है।
कोश्यारी ने कहा कि अंग्रेजों ने नैनीताल, मसूरी जैसे खूबसूरत शहर बसाए, देश आजाद होने के बाद हम एक भी पर्यटन स्थल विकसित नहीं कर पाए। प्रधानमंत्री ने स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा की है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पिथौरागढ़, धानाचूली, मुक्तेश्वर, रामगढ़, गैरसैंण, बड़कोट, पुरोला को स्मार्टसिटी के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्ताव भेजने को कहेंगे, केंद्र से भरपूर मदद मिलेगी।
सभापति चयन में कांग्रेस में विरोध
सभापति के मनोनयन में कांग्रेस के क्षेत्रीय विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात ने अपनी ही सरकार के कृषि मंत्री हरक सिंह रावत पर निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया है।
विधायक ने कृषि मंत्री के अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भेजकर विरोध व्यक्त किया है। विधायक ने मंत्री को स्वेच्छाचारी मानसिकता का प्रतीक बताकर कहा है उन्हें पद पर बने रहने का हक नहीं है।
उन्होंने कहा है सभापति के मनोनयन में मंत्री द्वारा पैसे लिए जाने के जो आरोप उन पर लगते हैं इससे सही साबित हो रहे हैं।
बता दें कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने अनिल गुप्ता को विकासनगर मंडी का सभापति और राजीव जैन को उपसभापति नियुक्त किया है। इससे विधायक नवप्रभात नाराज चल रहे हैं।
विधायक का आरोप है चयन में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है। चयन में न तो उनकी राय ली गई और न ही कांग्रेस संगठन के किसी व्यक्ति को विश्वास में लिया गया। कहा जिस व्यक्ति को सभापति के पद पर मनोनीत किया गया है उसे कोई भी क्षेत्रीय कार्यकर्ता नहीं जानता।
ऐसे में उन्होंने कृषि मंत्री के साथ ही राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र लिखकर कांग्रेस विधानमंडल दल की बैठक बुलाने की मांग की है, जिसमें वह अपना पक्ष रख सके।
कृषि मंत्री ने मनमर्जी से सभापति का चयन किया है। जिस व्यक्ति को सभापति बनाया गया है, उसे न तो मैं जानता हूं और न ही कोई कार्यकर्ता। जो कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा है।
- नवप्रभात, विधायक कांग्रेस
महर का तीसरा धमाका, नवप्रभात भी हुए नाराज
हरीश रावत सरकार के खिलाफ असहमति और विरोध केस्वर थम नहीं रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री इसे स्वभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं।
सीएम से नाराज उनके अपने जिले पिथौरागढ़ के कांग्रेसी विधायक मयूख महर ने शनिवार को तीसरा धमाका करते हुए सरकार पर सीमांत इंजीनियरिंग कालेज को वादे के मुताबिक राजकीय घोषित न करने का आरोप लगाया।
उधर, विकासनगर केकांग्रेसी विधायक नवप्रभात ने मंडी समिति के सभापति तय करने में मनमानी का आरोप लगाते हुए कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने मंत्री को स्वेच्छाचारी मानसिकता का बताते हुए इस्तीफा तक मांग लिया। नवप्रभात के धमाके का असर हुआ और मनोनयन पर स्टे हो गया।
इंजी. कॉलेज का मामला लटकाए है सरकार
अपनी ही सरकार के खिलाफ और मुखर होते हुए विधायक मयूख महर ने एक हफ्ते के भीतर तीसरी बार निशाना साधा है।
पिथौरागढ़ विधायक ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि पिथौरागढ़ के सीमांत इंजीनियरिंग कालेज को तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा और मौजूदा मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों ने ही सरकारी घोषित करने का ऐलान किया था लेकिन कॉलेज अब तक उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) से संबद्ध है।
उन्होंने कहा कि जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण इंजीनियरिंग कालेज को राजकीय घोषित करने की मांग उठाई थी। जनता आस लगाए बैठी है कि कालेज सरकारी होगा और इसकी फीस वहन करने की सीमा में यहां के लोग आ सकेंगे।
इससे पूर्व महर ने पहली सितंबर को पिथौरागढ़ के लुंठ्यूड़ा में बेस अस्पताल, आंवलाघाट पेयजल योजना का मामला लटकाने का आरोप शासन पर लगाया था। चार सितंबर को रई झील की रकम वापस होने के मामले में सीएम के खिलाफ मोर्चा खोला था।
नंदा राजजात में बदइंतजामी के आरोप
हाल ही में नंदा राजजात यात्रा से लौटे अल्मोड़ा से भाजपा सांसद अजय टम्टा ने प्रदेश सरकार पर यात्रा में बदइंतजामी के आरोप लगाए हैं। पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर टम्टा ने कहा कि नंदा राजजात यात्रा पर गए कुछ लोगों के लापता होने या उनके साथ किसी दुर्घटना होने की आशंका है।
इसलिए प्रदेश सरकार को पुलिस के साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, एसएसबी से पूरे ट्रैक पर तत्काल कॉंबिंग करानी चाहिए, ताकि किसी तरह की जनहानि का पता चल सके। भाजपा सांसद ने कहा कि कई लोग अब तक अपने परिजनों के संपर्क में नहीं हैं।
आरोप लगाया कि सरकार ने यात्रा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए थे। जूरागली से शिला समुद्र तक पेयजल तक की व्यवस्था नहीं थी। शिला समुद्र में रुकने के लिए 200-250 तंबू थे और सरकार यहां पर 15000 लोगों के रात्रि विश्राम का दावा कर रही थी।
उच्च हिमालयी क्षेत्र की इस यात्रा में जाने से पहले सरकार ने लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं कराया। कई लोगों को ऑक्सीजन की कमी से परेशानी हुई। कहा कि इस यात्रा के लिए कोई इंतजाम नहीं करके आपदा को न्योता दिया था। लेकिन मां नंदा की कृपा से यात्रा ठीक संपन्न हो गई है।
सांसद ने कहा कि कई जगह जोखिम भरे मार्ग थे। ऐसे में आशंका है कि कुछ लोग भटक गए हों या किसी के साथ कोई दुर्घटना हो गई हो। कहा कि ये आशंका इसलिए भी है क्योंकि काफी लोग अब तक अपने परिजनों के संपर्क में नहीं आए हैं।
करोड़ों ठिकाने लगाने का भी आरोप
भाजपा सांसद अजय टम्टा ने प्रदेश सरकार पर नंदा राजजात यात्रा के लिए केंद्र से मिले करोड़ों रुपए ठिकाने लगाने का भी आरोप लगाया। कहा कि सरकार को इस यात्रा पर खर्च धनराशि का ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए, क्योंकि इसमें भी बड़ा घोटाला हुआ है।
कांग्रेस के भीतर हर रोज शह-मात का खेल
मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के भीतर ही हरीश रावत के राजनीतिक प्रबंधन की गांठ भी खुलती दिख रही है। जिस राजनीतिक समस्या से सीएम रहते हुए विजय बहुगुणा ग्रसित रहे उससे कहीं बड़ी बीमारी अब पैदा हो गई है।
फर्क इतना है कि बहुगुणा का विरोध केवल हरीश समर्थक विधायक करते थे, और अब हरीश को अपनो का भी विरोध झेलना पड़ रहा है। फिलहाल मयूख महर पर बहुगुणा कैंप ने बारिकी से नजर गड़ा दी है। कांग्रेस के भीतर एक बार फिर उठापटक का दौर है।
पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर कभी हरीश के मजबूत सिपहसालार रहे है। हरीश केलिए ही उन्होंने बहुगुणा सरकार में कोई भी पद लेने से मना कर दिया था। लेकिन पूर्व विधायक हरीश धामी व रणजीत रावत की सत्ता में अप्रत्याशित भागीदारी के चलते मयूख अब हरीश से दूर होते जा रहे है।
चुनावी वादे अपनी जगह हैं, राजनीतिक के साथ बिजनेस गेम भी बड़ी वजह है। प्रदेश भर के खनन के कारोबार में सत्ता केनजदीकीनेताओं का पूरा दखल है। और इसी कारोबार केमाहिर मयूख चम्पावत में अपना पट्टा आवंटित कराने में भी खेत रहे।
बताते हैं कि धारचूला से सीएम को जितवाकर धामी जितना ताकतवर हुए मयूख खुद को उतना ही कमजोर समझने लगे। लेकिन यह प्रकरण सीएम के लिए मुसीबत बन रहा है। क्योंकि बहुगुणा सरकार के अस्थिर होने का नजारा हरीश किनारे बैठकर लेते थे, और आज विरोधी गुट उसी बात का मजा ले रहा है।
हरीश का अपने विधायकों का गुट हैं। जिनमें ज्यादातर कुमाऊं के विधायक हैं। लेकिन इनमें इंदिरा ह्दयेश और यशपाल आर्य नहीं है। इंदिरा के पास संख्याबल तो नहीं है लेकिन बहुगुणा कैंप के कुछ विधायक उन्हें इस लड़ाई में आगे कर देते है। लेकिन इस लड़ाई को कोई अंत नहीं है, क्योंकि जो विधायक इंदिरा को सपोर्ट करते हैं वो बहुगुणा के वफादार हैं।
एक बड़े क्षत्रप नवप्रभात की बहुगुणा के साथ नाराजगी की वजह है। क्योंकि प्रीतम सिंह जितना बहुगुणा केनजदीक जाते है, नवप्रभात उतने ही दूर हो जाते है। इधर हरक सिंह पूरी तरह से बहुगुणा पर भरोसा करते है।
सुबोध उनियाल व विजयपाल सजवाण को पूरी तरह से बहुगुणा कैंप का माना जाता है। हरीश के सत्ता में आने के थोड़े ही दिन बाद मंत्री यशपाल आर्य पूरी तरह से किनारे पर चले गए है।