सरकार का दावा, हरिद्वार से लेकर बद्रीनाथ तक स्थापित कर दिए गए हैं सीवर ट्रीटमेंट प्लांट
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प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश कर दावा किया है कि गंगा के पानी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए हरिद्वार से लेकर बद्रीनाथ तक कई स्थानों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर दिए गए हैं। सरकार के जवाब से संतुष्ट मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धनिक की खंडपीठ ने दिल्ली निवासी अजय गौतम की याचिका निस्तारित की।
पूर्व में अजय गौतम ने हाईकोर्ट को पत्र भेजकर शिकायत की थी कि गंगा और यमुना का पानी आचमन योग्य भी नहीं रह गया है। हाईकोर्ट ने इस पत्र का संज्ञान लेकर सरकार से पूछा था कि गंगा और यमुना के पानी को शुद्ध करने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
सरकार की ओर से बुधवार को कोर्ट में पेश किए गए शपथपत्र में कहा गया कि गंगा और यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कई तरह से काम किया जा रहा है। हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनीकीरेती, तपोवन, रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, बद्रीनाथ, केदारनाथ सहित अन्य स्थानों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं।
याची का कहना था कि गंगा और यमुना नदी पर करोड़ों हिंदू लोगों की आस्था है। हिंदू रोज गंगा और यमुना नदी के पवित्र जल से आचमन व इस जल को मंदिरों में चढ़ाते है। गंगा और यमुना का पानी आचमन योग्य नही रह गया है और गंगा में जगह जगह गंदगी डाली जा रही है। कई जगह से सीवर का पानी भी गंगा में डाला जा रहा है।