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चारधाम देवस्थानम बोर्ड मामले में उत्तराखंड सरकार को बड़ी राहत, सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका हाईकोर्ट से खारिज

Tue, 21 Jul 2020 02:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 21 Jul 2020 02:02 PM IST
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uttarakhand government get relief form nainital high court on chardham shrine board
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : पीटीआई (file photo)

चारधाम श्राइन बोर्ड (चारधाम देवस्थानम एक्ट) मामले में उत्तराखंड सरकार को बड़ी राहत मिली है। नैनीताल हाईकोर्ट ने सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने राज्यसभा सांसद व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी को झटका देते हुए अधिनियम को संवैधानिक करार दिया है। 

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वहीं कोर्ट ने फैसले के बाद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्वीट के जरिए कहा है कि वह इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। 

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई के बाद 06 जुलाई को निर्णय सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को खंडपीठ ने निर्णय सुनाते हुए प्रदेश सरकार को बड़ी राहत देते हुए जनहित याचिका को खारिज कर दिया।
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कोर्ट इस प्रकरण पर 29 जून से प्रतिदिन सुनवाई कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मामले की सुनवाई हुई थी
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मामले के अनुसार सुब्रमण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश सरकार की ओर से चारधाम के मंदिरों के प्रबंधन को लेकर लाया गया देवस्थानम बोर्ड एक्ट असांविधानिक है।

राज्य सरकार ने कहा कि एक्ट बिल्कुल भी असांविधानिक नहीं

देवस्थानम बोर्ड के माध्यम से सरकार का चारधाम व 51 अन्य मंदिरों का प्रबंधन लेना संविधान के अनुच्छेद 25, 26 व 32 का उल्लंघन है और यह जनभावनाओं के विरुद्ध है।  

कहा था कि इसमें मुख्यमंत्री को भी शामिल किया गया है, जबकि सीएम का कार्य तो सरकार चलाना है और वे जनप्रतिनिधि हैं, उन्हें इस बोर्ड में रखने का कोई औचित्य नहीं है। मंदिर के प्रबंधन के लिए पहले से ही मंदिर समिति का गठन हुआ है। जिस पर कोर्ट ने राज्य सरकार ने पूछा था कि क्या यह एक्ट असांविधानिक है।

जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि एक्ट बिल्कुल भी असांविधानिक नहीं है और न ही इससे संविधान के अनुछेद 25, 26 और 32 का उल्लंघन होता है। राज्य सरकार ने एक्ट को बड़ी पारदर्शिता से बनाया है। मंदिर में चढ़ने वाला चढ़ावे का पूरा रिकार्ड रखा जा रहा है, इसलिए यह याचिका निराधार है और इसे निरस्त किया जाए। 

मुख्यमंत्री ने कोर्ट के आदेश का किया स्वागत

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। कहा कि कोर्ट के इस फैसले सेे सरकार की भावनाओं पर मुहर लगी है। भविष्य की जरुरतों को ध्यान  में रखकर यह बोर्ड बनाया गया है। यात्रा कैसे सुरक्षित हो इसका ध्यान रखा गया है।

कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया है। सभी को इस पर विश्वास करना चाहिए। कहा कि सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता सबके पास है। सबके हित सुरक्षित रखे जाएंगे। चारधाम के हालात को हमने देखा है। पंडा-पुरोहितों को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है। यह 19 साल में सबसे सुधारात्मक फैसला है।

पूर्व मुख्यमंत्री स्व. नारायण दत्त तिवारी भी यह व्यवस्था चाहते थे। उनकी सरकार ने ही चारधाम विकास परिषद का गठन किया था।

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