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चहेतों के मुकदमे वापस ले रही उत्तराखंड सरकार
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 07 Aug 2015 01:18 PM IST
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उत्तराखंड में सत्ता पक्ष से जुड़े ऊंचे पदों पर बैठे लोग हों या फिर सत्ता के बाहर के, जनहित दरकिनार कर ऐसे लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जा रहे हैं, जिन पर फिरौती और फर्जीवाड़ा सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।
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शासन की ओर से पिछले डेढ़ साल के भीतर 29 से अधिक मुकदमों की वापसी के निर्देश हुए हैं। इनमें कई मुकदमे फिरौती, फर्जीवाड़े, आईटी एक्ट जैसे गंभीर प्रकृति के हैं। कानून के जानकारों के मुताबिक, ऐसे मामले जो जनहित के हों और जिनका चलाया जाना जनता के हितों को प्रभावित करता है, उन मुकदमों को सरकार वापस ले सकती है।
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जैसे समाज के कुछ वर्गों में सांप्रदायिक मामलों को इस वजह से वापस लिया जा सकता है, जिससे विभिन्न वर्गों में सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा मिलता हो। इसके अलावा जनता से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन से संबंधित मामले, औद्योगिक शांति बनाए रखने के लिए श्रमिकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे सरकार वापस ले सकती है।
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धारा 321 के तहत मुकदमों की वापसी का प्रावधान विधायिका द्वारा इन सब उद्देश्यों को लेकर किया गया है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में जनहित नहीं चहेतों के हित से जुड़े मुकदमे वापस हुए हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि गंभीर अपराधों से जुड़ें इस तरह के मुकदमों की वापसी उस व्यक्ति के साथ अन्याय है, जिनके खिलाफ अपराध हुआ है।
अपर सचिव गृह रहे जेपी जोशी की ओर से बसंत विहार थाने में कुछ लोगों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग, षड़यंत्र, 67 ए आईटी एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने संयुक्त सचिव सुमन सिंह वल्दिया सहित छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। सरकार ने जनहित का न होने के बावजूद वल्दिया का मुकदमा वापस लेने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभियोजन की ओर से इसका विरोध किया गया है।
खेल एवं वन मंत्री दिनेश अग्रवाल के खिलाफ कोतवाली में प्रिवेंसन ऑफ इन्सल्ट द नेशनल ओनर एक्ट 2005 के तहत मुकदमा दर्ज है। मंत्री पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्र ध्वज का अपमान किया है।
आठ फरवरी वर्ष 2007 को लक्ष्मण चौक विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय ध्वज पर बने बैनर में उनका फोटो होने पर यह मामला दर्ज हुआ था। सरकार ने इस मामले में भी मुकदमा वापसी के निर्देश दिए हैं।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री रहे मनीष वर्मा के खिलाफ कोतवाली में छल, धोखाधड़ी, किसी मूल्यवान चीज की कूट रचना करने, फर्जी दस्तावेज और अमानत में खयानत सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
आरोप है कि मेडिकल काउंसिल की परमिशन के बगैर ही उन्होंने एक मेडिकल कालेज में कई छात्राओं से फीस लेकर उनका रजिस्ट्रेशन किया। कालेज में पाठ्यक्रम चलाने के लिए गलत-गलत तरीके से अनापत्ति दर्शाई।
सरकार केवल जनहित से जुड़े मुकदमे वापस ले सकती है न कि फिरौती और धोखाधड़ी के। इस तरह के मुकदमों की वापसी उन सभी लोगों के साथ अन्याय है, जिनके खिलाफ अपराध हुआ है।
- आरएस राघव, वरिष्ठ अधिवक्ता
यौन शोषण प्रकरण से जुड़े मामले में जेपी जोशी ने जिन लोगों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है, उसमें छह लोग शामिल हैं, एक ही मामले में छह में से एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमे की वापसी से अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा साबित करना आसान नहीं होगा। इस प्रकरण में सभी आरोपियों पर आरोप तय हो चुके हैं। शुक्रवार को इस प्रकरण की सुनवाई है।
- मनोज कुमार मल्होत्रा, अधिवक्ता