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उत्तराखंड: कर्मचारियों के तेवर हुए तल्ख, 27 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

Fri, 13 Dec 2019 10:08 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 13 Dec 2019 10:08 AM IST
सार

  • लंबित मांगों को लेकर छह जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा शुरू
  • उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वयक मंच ने किया एलान 

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Uttarakhand Government Employees will do Indefinite Strike from 27th January
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच पदोन्नति पर लगी रोक हटाने समेत सात सूत्रीय मांगों को लेकर छह जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 27 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। आंदोलन के लिए सभी जनपदों से समन्वय स्थापित करने के लिए रघुवीर सिंह बिष्ट को मंच का मुख्य समन्वयक नियुक्त किया गया है। 

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बृहस्पतिवार को यमुना कालोनी स्थित सद्भावना भवन में आयोजित अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच के संयोजक मंडल की बैठक में लंबित मांगों पर चर्चा करने के बाद आंदोलन का एलान किया गया। जिसमें 6 से 14 जनवरी तक सभी जनपदों में जन जागरण अभियान चला कर मंत्रियों व जनप्रतिनिधियों को मांग पत्र सौंपे जाएंगे। 22 जनवरी को जनपद स्तर पर एक दिवसीय धरना देकर डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। 27 जनवरी को राजधानी मुख्यालय में प्रदेश स्तरीय रैली आयोजित होगी। इसीदिन अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की जाएगी।
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मंच के मुख्य संयोजक नवीन कांडपाल और सचिव संयोजक सुनील कोठारी ने कहा कि सरकार ने वर्तमान में पदोन्नति पर रोक लगा रखी है। प्रदेश भर में सैकड़ों कर्मचारी सेवानिवृत्ति होने वाले हैं। यदि सरकार पदोन्नति पर रोक नहीं हटाती है तो पदोन्नति का लाभ नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान होगा। पूर्व में भी लंबित मांगों को लेकर समन्वय मंच ने समझौते के अनुरूप आंदोलन स्थगित किया था।
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आज तक सरकार व शासन स्तर पर समझौते पर अमल नहीं किया गया। बैठक में संयोजक हरीश नौटियाल, प्रांतीय प्रवक्ता पूर्णानंद नौटियाल,प्रतात सिंह पंवार, पंचम सिंह बिष्ट, सुभाष देवलियाल, रमेश रमोला, संदीप कुमार मौर्य, विक्रम सिंह, अजय बेलवाल, परवेश सेमवाल, मुकेश रतूड़ी, अनिल सिंह, अरविंद सिंह चौहान, मुकेश बहुगुणा, अनंत राम शर्मा, अखिलेश उनियाल, केदार फरस्वाण, राजेंद्र सिंह गुसाईं, नत्थी राम जुयाल आदि मौजूद रहे। 

ये हैं संघ की प्रमुख मांगें

- पदोन्नति पर लगी रोक को तत्काल हटा कर पदोन्नति के आदेश जारी किए जाए।
- केंद्र की तर्ज पर सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए आयुष्मान योजना में कैशलेस इलाज की सुविधा लागू कर सरकारी अस्पतालों से रेफर की बाध्यता समाप्त की जाए।
- अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्व व्यवस्था को यथावत लागू रखना।
- कर्मचारियों को पूरे सेवाकाल में तीन पदोन्नतियां और 10,16,26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नत वेतनमान अनिवार्य रूप से प्रदान करना।
- एक अक्तूबर 2005 से लागू अंशदायी पेंशन योजना को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करना।
- ट्रांसफर एक्ट में सेवानिवृत्ति के अंतिम वर्ष में ऐच्छिक स्थान पर अनिवार्य रूप से स्थानांतरण का प्रावधान किया जाए।
- वेतन विसंगति समिति की रिपोर्ट में कर्मचारी विरोधी निर्णयों को लागू न करना।

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