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टीएचडीसी के बिकने से उत्तराखंड सरकार भी उलझी, त्यूनी प्लासू पर एनटीपीसी से करनी होगी बात

Fri, 22 Nov 2019 10:35 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 22 Nov 2019 10:35 AM IST
सार

  • त्यूनी प्लासू पर एनटीपीसी से करनी होगी बातचीत
  • टीएचडीसी इस परियोजना पर 15 प्रतिशत रायल्टी देने को था सहमत

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Uttarakhand government also got stuck due to THDC sale
टिहरी झील - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

करीब एक हजार करोड़ की त्यूनी प्लासू परियोजना के लिए अब सरकार को एनटीपीसी से बात करनी होगी। अब तक सरकार इस परियोजना के निर्माण को लेकर टीएचडीसी से बात कर रही थी।

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टीएचडीसी भी इस परियोजना के लिए प्रदेश सरकार को 15 प्रतिशत तक रायल्टी देने पर सहमत थी। प्रदेश सरकार के स्तर से हो रही यह बातचीत परवान चढ़ पाती इससे पहले ही केंद्र सरकार ने टीएचडीसी को एनटीपीसी को सौंप दिया।
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देहरादून में त्यूनी में प्रस्तावित 72 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन की परियोजना को निर्माण के हिसाब से वैसे भी बेहतरीन माना जा रहा है। सिंचाई विभाग के सूत्रों के मुताबिक इस परियोजना के डूब क्षेत्र से कोई भी परिवार नहीं है। अधिक से अधिक त्यूनी बाजार के कुछ लोगोें की जमीन इसकी जद में आएगी।
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दूसरी ओर, परियोजना में अधिकतर वन क्षेत्र हैं और इस हिसाब से इस परियोजना के लिए किसी तरह की भूमि का मुआवजा भी नहीं दिया जाना है। वन भूमि की क्षतिपूर्ति ही नाम मात्र करनी होगी। प्रदेश सरकार की ओर से इस परियोजना के निर्माण के लिए टीएचडीसी से भी बात की जा रही थी।

सूत्रों के मुताबिक इस मामले को लेकर एक दौर की बातचीत भी हो गई थी। टीएचडीसी इसके लिए 15 प्रतिशत रायल्टी विद्युत उत्पादन पर प्रदेश सरकार को देने के लिए सहमत भी हो गया था। अब प्रदेश सरकार को इस मामले को लेकर एनटीपीसी से बात करनी होगी। कारण ये भी है कि केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को टीएचडीसी को एनटीपीसी को दे दिया गया। 
 

जन सुनवाई का आदेश भी जारी

त्यूनी प्लासू परियोजना की जन सुनवाई के लिए राज्य पर्यावरण एवं प्रदूषण बोर्ड ने आदेश भी जारी कर दिया है। सिंचाई विभाग पहले ही जन सुनवाई के लिए 75 हजार रुपये जमा कर चुका है। वर्तमान में पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस शुल्क को बढ़ाकर एक लाख रुपये कर चुका है। आदेश के मुताबिक जन सुनवाई अगस्त तक हर हाल में पूरी होनी है। 

टीएचडीसी के विनिवेश पर कांग्रेस में उबाल

देहरादून। टीएचडीसी के विनिवेश को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान किया है। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा है कि करोड़ों का मुनाफा कमाने वाली कंपनी को बेचकर प्रदेश की जनता को धोखा दिया गया है। प्रदेश के लोगों ने इस बांध को बनाने के लिए पूरे एक शहर की कुर्बानी दी। अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर होगी। 

किशोर उपाध्याय ने देवी देवताओं को जगाने का एलान किया

देहरादून। टीएचडीसी के विनिवेश के खिलाफ पहले से ही मुखर रहे कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि वे मामले में अपने विरोध को मरते दम तक जारी रखेंगे। प्रदेश सरकार इस बात को नहीं समझ पा रही है कि कुछ सालों बाद केंद्र सरकार के इस फैसले से राज्य को भारी नुकसान होगा। 25 साल बाद यह परियोजना पूरी तरह से प्रदेश सरकार के हाथ में होती क्योंकि यह प्रदेश की जमीन पर बनी हुई है।

अब परियोजना की समस्त संपत्ति का स्वामी एनटीपीसी को जाएगा। केंद्र सरकार ने अपने विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रदेश के लोगों के साथ धोखा किया है। वे इसके विरोध में टिहरी जाएंगे और लोगों से कहेंगे कि बांध नहीं बचा पाए तो लोक देवताआें को तो बचाओ। गंगा के पानी पर भी लोगों का हक नहीं रह पाएगा। 
 
धरने पर बैठे थे हरीश रावत 

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत टीएचडीसी के विनिवेश के विरोध में एक बार टीएचडीसी के ऋषिकेश स्थित मुख्यालय में धरने पर भी बैठ चुके हैं। बीते दिनों सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कंपनी के विनिवेश से साफ इनकार किया था और कहा था कि हरीश रावत को सपना आता है और वे धरने पर बैठ जाते हैं।

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