उत्तराखंड: सांसद बलूनी की पहल, अब आदर्श गांवों में तब्दील होंगे पहाड़ के ‘भुतहा गांव’
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उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में पलायन से निर्जन होने के बाद ‘भुतहा गांव’ कहलाने वाले गांवों का नीति आयोग कायाकल्प करेगा। आयोग ने सांसद अनिल बलूनी के पलायन के खिलाफ चलाई मुहिम के तहत 10 पर्वतीय जनपदों के 10 निर्जन गांवों को गोद लेने का निर्णय लिया है।
आयोग ऐसे गांवों को मॉडल गांव के तौर पर विकसित करेगा। यही नहीं, आयोग प्रदेश में पलायन की समस्या पर उच्च स्तरीय अध्ययन रिपोर्ट भी तैयार करवाएगा। आयोग की विशेषज्ञ टीम सांसद बलूनी के गोद लिए गए बौर गांव का भी दौरा करेगी।
सांसद बलूनी उत्तराखंड में पलायन की समस्या को लेकर भारत सरकार के मंत्रालयों और संस्थानों से निरंतर संवाद कर रहे हैं। इस कड़ी में बुधवार को उन्होंने नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार से भेंट की और उत्तराखंड में भयावह होती पलायन की समस्या के समाधान के लिए नीति आयोग से सहयोग मांगा।
सांसद बलूनी ने वन अधिनियम के कारण रुके हुए विकास कार्यों और मूलभूत सुविधा ना होने के कारण सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों की अनुपलब्धता और स्थानीय नागरिकों के पलायन के विषय पर चर्चा की।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने उत्तराखंड जैसे हिमालयी और सामरिक प्रांत के पलायन को गंभीर समस्या माना। इस अवसर पर नीति आयोग के अटल इन्नोवेशन मिशन के निदेशक डॉ. उन्नत पंडित भी उपस्थित थे। जल्द ही डॉ. पंडित सांसद बलूनी के साथ बौर गांव का दौरा भी करेंगे।
पलायन की समस्या के निदान को लेकर नीति आयोग से मदद मांगी है। आयोग 10 निर्जन गांवों को गोद लेने और अध्ययन रिपोर्ट तैयार करने को सहमत है। वहीं, राज्य के जागरूक नागरिकों, संस्थाओं के साथ साथ प्रवासियों से भी इस अभियान में सहयोग की अपेक्षा है।
- सांसद अनिल बलूनी