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उत्तराखंड आपदा: 17 से 19 अक्तूबर के बीच भारी बारिश में कुमाऊं की चार नदियों ने बदला अपना रुख 

Sat, 30 Oct 2021 11:27 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 30 Oct 2021 11:27 AM IST
सार

Uttarakhand Floods: नदियां अब अपने प्राकृतिक स्वरूप से इतर बह रही हैं। जिससे मानव बस्तियों को खतरे की आशंका बन रही है। नदियों के बदले इस रूख का आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे।

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uttarakhand floods: Four rivers of Kumaon changed their way due to heavy rains between 17 and 19 October
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

प्रदेश में 17 से 19 अक्तूबर के बीच भारी बारिश के बाद आई आपदा ने कुमाऊं की चार नदियों के बहाव का मार्ग बदलकर रख दिया है। कुछ क्षेत्रों में नदियों का बहाव मानव बस्तियों की ओर मुड़ गया है। इससे आने वाले दिनों में बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

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खनन और गश्त जैसे कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा
अन्य क्षेत्रों में नदियों के बहाव के रुख में आए इस परिवर्तन से वन विभाग के खनन और गश्त जैसे कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। अब वन विभाग ने नदी चैनलों और इस परिवर्तन के प्रभाव पर अध्ययन करने के लिए आईआईटी रुड़की से संपर्क साधा है।
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17, 18 और 19 अक्तूबर को भारी बारिश के चलते कुमाऊं क्षेत्र में कोसी, गौला, नंधौर और डबका नदी उफान पर थीं। इस दौरान इनमें भारी मलबा (आरबीएम) भी साथ आया। जिससे इन नदियों का रास्ता बदलने के साथ इनके चैनल परिवर्तित हो गए। 17 अक्तूबर से विनाशकारी बारिश के बाद वन विभाग सर्वेक्षण के बाद पाया कि कुमाऊं की कोसी, गौला, नंधौर और डबका में उफनती नदियों ने अपना मार्ग बदल दिया है।
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मानव बस्तियों के लिए बड़ा खतरा

कुछ क्षेत्रों में नदियां मानव बस्तियों की ओर बहने लगी हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में, परिवर्तन से वन विभाग के खनन और गश्त जैसे कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पश्चिमी सर्कल (उत्तराखंड) की मुख्य वन संरक्षक तेजस्विनी पाटिल ने बताया कि नदियों के मार्ग में बदलाव, हमारी चिंता का बड़ा विषय है।

नदी के स्वरूप में आए परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए कहा
इस संबंध में आईआईटी रुड़की से नदी के स्वरूप में आए परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए कहा गया है। ताकि हम नदी पर तटबंधों का निर्माण कर सकें।

पाटिल ने कहा कि तकनीकी मूल्यांकन में यह बात सामने आई है कि चारों नदियां अब अपने सामान्य चैनलों के माध्यम से बहने के बजाय, कहीं किनारों की ओर तो कहीं दूसरी ओर बह रही हैं। भारी बारिश में आई गाद ने समस्या को ओर बढ़ा दिया है। आने वाले समय में यह मानव बस्तियों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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