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उत्तराखंडः 5000 गांवों में 'लाइफ लाइन' नहीं

Fri, 22 Jan 2016 04:38 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 22 Jan 2016 04:38 PM IST
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uttarakhand five thousand village not connected with roads.

उत्तराखंड गठन के 15 साल बाद भी राज्य के पांच हजार से ज्यादा गांव ऐसे हैं जहां लाइफ लाइन कही जाने वाली पक्की सड़कें नहीं हैं।

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उत्तराखंड में करीब 34 प्रतिशत गांव हैं, जिनको पक्की सड़क का इंतजार है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का 2016-17 का स्टेट फोकस पेपर इसकी तस्दीक कर रहा है।

नाबार्ड की इस रिपोर्ट से जाहिर है कि प्रदेश में पर्वतीय जिलों के हाल और भी ज्यादा खराब हैं। ऊधमसिंह नगर के करीब 99 प्रतिशत गांव पक्की सड़क से जुड़े हुए हैं तो चंपावत जैसा जिला भी प्रदेश में है जहां 62 प्रतिशत गांव अभी पक्की सड़क का इंतजार कर रहे हैं।

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सड़कों को लेकर रोज हो रहे आंदोलन

uttarakhand five thousand village not connected with roads.

प्रदेश में सड़कों को लेकर आंदोलन रोज की बात है। हाल यह है कि प्रदेश में 34 प्रतिशत गांव आज भी पक्की सड़कों की बाट जोह रहे हैं। यह तब है, जबकि पहाड़ में सड़क लाइफ लाइन मानी जाती है। संपर्क का एकमात्र जरिया भी सड़क ही है।

यातायात के अलावा उत्पादों को गांव से मंडियों तक पहुंचाने का जरिया भी सड़क ही है। पर्वतीय जिलों का हाल तो और भी बुरा है। चंपावत में केवल 38 प्रतिशत गांवों को पक्की सड़क मुहैया है। अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भी पक्की सड़क के मामले में गांवों के लोगों को हिचकोले खाते हुए सफर करना पड़ रहा है।

इसके उलट ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून के मैदानी इलाकों पर प्रदेश की सरकारें खासी मेहरबान रही हैं। ऊधमसिंह नगर में 99 प्रतिशत तो हरिद्वार में 95 प्रतिशत से अधिक गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा जा चुका है।

4724 किलोमीटर सड़क ही बन पाई अब तक

uttarakhand five thousand village not connected with roads.

प्रदेश में सड़क विकास का पैमाना भी है। विधायक निधि से सबसे अधिक प्रस्ताव सड़कों के ही होते हैं। प्रदेश में ग्रामीण सड़कों का दारोमदार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर है।

शासन के मुताबिक 8599 किलोमीटर सड़क इस योजना के तहत स्वीकृत हैं। इसमें से 4724 किलोमीटर सड़क बनाई जा चुकी हैं। 3135 किलोमीटर सड़क पर काम जारी है और 285 किलोमीटर सड़क पर काम शुरू ही नहीं किया जा सका है। 453 किलोमीटर सड़क पर वन अधिनियम के कारण काम शुरू ही नहीं किया जा सका है।

जिला - पक्की सड़क वाले गांव (प्रतिशत में)
अल्मोड़ा - 50
बागेश्वर - 50.35
चमोली - 65.18
चंपावत - 38
पौड़ी - 60.56
पिथौरागढ़ - 43.64
रुद्रप्रयाग - 80.25
टिहरी - 71.74
उत्तरकाशी - 52.34
देहरादून - 76.43
हरिद्वार - 95.25
नैनीताल - 73.60
ऊधमसिंह नगर - 98.48

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