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उत्तराखंड: प्रदेश में तीन साल में 19 प्रतिशत बढ़ा मछली का उत्पादन
Sun, 22 Nov 2020 01:37 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Sun, 22 Nov 2020 01:37 PM IST
सार
- अगले दो साल में 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य
- प्रदेश में 20 हजार मत्स्य पालक कर रहे उत्पादन
- विश्व मात्स्यिकी दिवस पर मत्स्य पालकों को किया सम्मानित
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
उत्तराखंड में बीते तीन साल के भीतर मछली उत्पादन में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, मत्स्य पालकों की संख्या भी पांच हजार से बढ़कर 20 हजार हो गई है। सरकार ने अगले दो साल में मत्स्य उत्पादन को 50 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
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शनिवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में मत्स्य विभाग की ओर से आयोजित विश्व मात्स्यिकी दिवस पर मत्स्य पालन मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि मत्स्य पालन एक वर्ग विशेष तक सीमित नहीं रह गया है।
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अब आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी मत्स्य पालन कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र और प्रदेेश सरकार की योजनाओं के चलते पिछले तीन साल में मत्स्य उत्पादन में 19 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2016-17 में 4297 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन था जो बढ़ कर वर्ष 2019-20 में 5130 मीट्रिक टन हो गया है।
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उन्होंने कहा कि नील क्रांति कार्यक्रम से 28.56 करोड़ की राशि केंद्र से दी गई। इसमें 440 ट्राउट रेसवेज, 118 रनिंग वाटर तालाब, 64.12 हेक्टेयर में रियरिंग यूनिट, दो एक्वाक्लचर यूनिट, 21.50 हेक्टेयर में नए तालाबों का निर्माण किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी ने मत्स्य पालकों को किसान का दर्जा दिया है।
अब मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट बनाए जा रहे हैं। प्रदेश के 450 मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए। पिछले साल डेनमार्क से दो लाख ट्राउट सीड आयात किए गए। इस साल 12 लाख सीड आयात करने की प्रक्रिया चल रही है।
किसानों को उच्च गुणवत्ता का मत्स्य बीज देने के लिए रुद्रप्रयाग जिले में पांच करोड़ की लागत से ट्राउट ब्रूड बैंक स्थापित किया जा रहा है। प्रदेश में उत्पादित फिश की मार्केटिंग के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में 20 उत्तरा फिश आउटलेट स्थापित किए जाएंगे। इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य सलाहकार आरएन पंडिता, संयुक्त निदेशक एचके पुरोहित, मत्स्य फेडरेशन के अध्यक्ष नेपाल सिंह, उप निदेशक अपर्णा हल्दिया आदि मौजूद थे।
मत्स्य संरक्षण के लिए एक हजार किमी. क्षेत्र चिह्नित
ट्राउट और महाशीर मछली के संरक्षण के लिए विभाग ने नदियों में एक हजार किमी. क्षेत्र चिह्नित किया है। चयनित क्षेत्र में 51 बीट का निर्धारण कर स्थानीय युवक मंडल व महिला मंगल दलों को आवंटित किए गए। इन समूहों की ओर से एंगलिंग के लिए पर्यटकों को अनुमति दी जाएगी।