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केंद्र से मिलेगा 10 करोड़ का अनुदान, टिहरी के नौथा में बनेगा उत्तराखंड का पहला एग्रो क्लस्टर
Sat, 01 Jun 2019 12:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 01 Jun 2019 12:01 PM IST
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प्रदेश सरकार ने टिहरी जनपद के नौथा में पहला एग्रो क्लस्टर स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। एक सप्ताह के भीतर उत्तराखंड कृृषि उत्पादन विपणन बोर्ड को एग्रो कलस्टर बनाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। करीब 4.144 हेक्टेयर भूमि पर बनने वाले इस कलस्टर पर 23.25 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें 10 करोड़ का अनुदान केंद्र से मिलेगा। शेष धनराशि का प्रावधान मंडी बोर्ड, बीज प्रमाणीकरण, उद्यान विपणन बोर्ड और जैविक उत्पाद परिषद के माध्यम से किया जाएगा।
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शुक्रवार को विधानसभा में कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक में नौथा एग्रो क्लस्टर में तेजी लाने के लिए निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एग्रो क्लस्टर स्थापित करने के लिए धन की उपलब्धता सुनिश्चित कर एक सप्ताह के भीतर मंडी बोर्ड को धन उपलब्ध कराया जाए। क्लस्टर के लिए मंडी बोर्ड की ओर से 5.75 करोड़ का प्रावधान करेगा। इसमें पांच करोड़ ऋण लिया जाएगा। वहीं, बीज प्रमामीकरण बोर्ड को तीन करोड़, उद्यान विपणन बोर्ड को चार करोड़ और उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद को 50 लाख का प्रबंध करने का लक्ष्य दिया गया है।
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उनियाल ने कहा कि एग्रो क्लस्टर में स्थापित होने वाले खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों को मेगा फूड पार्क की तर्ज पर सुविधाएं व छूट का लाभ दिया जाएगा। नौथा स्थित भूमि पर निजी फर्मों के माध्यम से लगने वाली पांच इकाईयों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए डीपीआर तैयार की जाएगी। एग्रो कलस्टर के लिए 4.144 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है। इसमें कृषि विभाग की 2.486 हेक्टेयर भूमि मंडी बोर्ड को लीज पर दी गई है। जबकि 1.658 हेक्टेयर निजी भूमि मंडी परिषद ने क्रय की है। बैठक में सचिव उद्यान डी. सेंथिल पांडियन, प्रबंध निदेशक जैविक उत्पाद परिषद विनय कुमार, अपर निदेशक कृषि केसी पाठक, महाप्रबंधक मंडी बोर्ड विजय कुमार, प्रबंध निदेशक मंडी परिषद बीएस चलाल आदि मौजूद थे।
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फूड प्रोसेसिंग इकाईयों को मिलेगी ये छूट
एग्रो क्लस्टर में स्थापित होने वाली फूड प्रोसेसिंग और पैकेजिंग इकाईयों को पहली बार भूमि क्रय और लीज डीड में स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट दी जाएगी। उत्पादन प्रारंभ होने की तिथि से पांच वर्ष तक के लिए केंद्र व राज्य की जीएसटी और मंडी शुल्क पर छूट दी जाएगी।