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उत्तराखंड: बारिश की वजह से आपदा जैसे हालात, 132 परिवारों ने छोड़ा घर, मसूरी मे गिरा पुश्ता

Wed, 04 Jul 2018 09:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 04 Jul 2018 09:14 AM IST
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uttarakhand facing disaster in monsoon 2018 starting
मसूरी में ढका पुश्ता, मार्ग बंद

मानसून की शुरुआत में ही उत्तराखंड में आपदा जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इससे सबसे ज्यादा पिथौरागढ़ जिला प्रभावित हुआ है। वहीं मसूरी में लंढौर रोड पर पुश्ता गिर गया, जिससे मार्ग बाधित हो गया है। वहीं 4 जुलाई को भारी बारिश के पूर्वानुमान के चलते डीएम ने चंपावत जिले की शिक्षण संस्थाओं को बंद रखने के आदेश दिए हैं।

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मंगलवार मसूरी में लंढौर रोड पर पुश्ता गिर गया। जिस कारण नीचे मुख्य मार्ग पर नो पार्किंग में खड़े पर्यटकों के दो वाहन मलबे में दब गए। गनीमत रही कि उस समय वाहन में कोई नहीं था। पुश्ता गिरने से मार्ग बाधित हो गया है। इससे रोड के ऊपर स्थित सरकारी गेस्ट हाउस की बिल्डिंग खतरे की जद में आ गई है।
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वहीं पिथौरागढ़ जिले में करीब 132 परिवारों ने अपना घर छोड़ दिया है। लोगों ने जीआईसी और पंचायत घर में शरण ली हुई है। सोमवार को देर रात पिथौरागढ़ में धारचूला के हिमखोला में नारायण आश्रम को जोड़ने वाला मोटर पुल और तीनतोला में मोटर मार्ग बह गया है। वहीं हिमखोला में तीन और सिमखोला में चार मकान बहने की सूचना भी है।
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मदकोट में 78 परिवारों ने अपने घर छोड़ दिए

uttarakhand facing disaster in monsoon 2018 starting
पिथौरागढ़ में बाढ़ जैसे हालात - फोटो : amar ujala
लगातार हो रहे भूस्खलन की वजह से मदकोट में 78 परिवारों ने अपने घर छोड़ दिए हैं। इन लोगों ने जीआईसी और पंचायत घर में शरण ली हुई है। यहां भूस्खलन और बाढ़ से सड़क और पैदल मार्ग ध्वस्त हो चुके हैं। मदकोट टीआरसी में 10 फीट मलबा भरा पड़ा है।

वहीं नजंग से आगे बौलायर गाड़ में कैलाश यात्रियों समेत 50 लोग फंसे हुए हैं। एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और लोनिवि की टीम उन्हें रेस्क्यू करने के लिए रवाना हो चुकी है। जौलजीबी के 29 और गलाती के 25 परिवारों ने आपदा के डर से अपना घर छोड़ दिया है। नदी के तेज बहाव से धारचूला में तटबंद भी बह गए हैं।

उधर, बीरोंखाल में बारिश के चलते मंगलवार को राष्ट्रीय राजमार्ग काशीपुर-बुआखाल में मरचुला के पास एक पेड़ आ गिरा। जिससे करीब दो घंटे तक दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। बाद में जेसीबी से पेड़ और बोल्डर हटाए गए और यातायात सुचारू हो पाया। 
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