बजटः सड़क, बिजली और पानी की आस में उत्तराखंड
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट से उत्तराखंड को भी काफी उम्मीदें हैं। नौ मार्च से प्रदेश का बजट सत्र शुरू है।
बजट सत्र से पहले प्रदेश सरकार की कोशिश यह भी है कि केंद्रीय सहायता पर तस्वीर साफ हो जाए। उद्योगों को उम्मीद है कि जेटली के बजट से प्रदेश के उद्योगों को भी राहत मिलेगी। दूसरी ओर, प्रदेश सरकार ग्रीन बोनस और अवस्थापना विकास में भी केंद्र से सकारात्मक रुख की उम्मीद कर रही है।
14वें वित्त आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद से ही उत्तराखंड के लिए भी स्थिति खासी बदल गई है। वित्त आयोग की संस्तुतियों के लागू होने के बाद से ही प्रदेश सरकार करीब 1500 करोड़ रुपये के सीधे नुकसान की शिकायत कर रही है। केंद्रीय करों में उत्तराखंड का हिस्सा बढ़ा है पर विशेष योजना सहायता और केंद्रीय योजनाओं का फंडिंग पैटर्न बदल जाने से प्रदेश को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए केंद्रीय बजट से उत्तराखंड को इस बार केंद्रीय सहायता बढ़ने की उम्मीद है।
अवस्थापना विकास प्रदेश सरकार के लिए चुनौती
दूसरी ओर, अवस्थापना विकास प्रदेश सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। सड़क, बिजली, पानी और शहरी विकास की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र से नई योजनाओं की मांग भी की जा रही है। सीमांत क्षेत्रों का विकास प्रदेश के लिए चुनौती बना हुआ है। इसी तरह पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए भी बजट से नई योजनाओं की उम्मीद की जा रही है।
पर्यावरण को लेकर प्रदेश सरकार को खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खनन से अधिक राजस्व की उम्मीद है पर इस पर एनजीटी का सख्त रुख सरकार को आगे बढ़ने का मौका नहीं दे रहा। ऐसे में ग्रीन बोनस पर प्रदेश सरकार जोर दे रही है। इसके लिये केंद्र से 2000 करोड़ रुपये के ग्रीन बोनस की मांग भी की जा चुकी है।
उद्योगों को भी उम्मीद है कि केंद्र सरकार बाजार में मांग बढ़ाने के लिए सकारात्मक कदम उठायेगी। कर्मचारियों और नौकरी पेशा वर्ग को आयकर की छूट की सीमा में इजाफे की उम्मीद है। इसी तरह सेवा क्षेत्र के विस्तार के लिए भी केंद्र से नई योजनाओं की उम्मीद की जा रही है।