उत्तराखंड चुनाव 2022: ...तो क्या घरवापसी में छुपा है यशपाल आर्य के मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब
Uttarakhand Election 2022: सियासी जानकारों का कहना है कि यशपाल आर्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षा उन्हें कांग्रेस में ले आई। आर्य प्रदेश के उन गिने चुने कद्दावर नेताओं में से हैं, जो संगठन और सरकार में तकरीबन सभी बड़े ओहदों पर रह चुके हैं।
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भाजपा में साढ़े चार साल गुजारने के बाद ऐन विधानसभा चुनाव से पहले कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की घरवापसी के कई सियासी निहितार्थ हैं। माना जा रहा है कि आर्य ने मुख्यमंत्री बनने के सपने के साथ कांग्रेस में घरवापसी की है। हालांकि आर्य का कहना है कि वह भाजपा में असहज थे और वह पार्टी की विचारधारा से तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे।
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सियासी जानकारों का कहना है कि यशपाल आर्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षा उन्हें कांग्रेस में ले आई। आर्य प्रदेश के उन गिने चुने कद्दावर नेताओं में से हैं, जो संगठन और सरकार में तकरीबन सभी बड़े ओहदों पर रह चुके हैं। अपने चार दशक के राजनीतिक जीवन में आर्य सात साल तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे। कांग्रेस सरकार में इंदिरा हृदयेश के बाद दूसरे वरिष्ठ मंत्री थे। विधानसभा अध्यक्ष से लेकर कैबिनेट मंत्री तक रहे। भाजपा सरकार में वह समाज कल्याण व परिवहन मंत्री रहे और बाद में धामी सरकार में आबकारी मंत्रालय भी मिला।
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राजनीतिक समीक्षकों के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले उनके भाजपा छोड़ने की तीन प्रमुख वजह बताई जा रही हैं। पहली, आर्य को यह एहसास हो चुका है कि तराई में भाजपा के लिए चुनाव उतना सहज नहीं रहेगा। दूसरी, वह उम्र के जिस पड़ाव पर हैं, सक्रिय राजनीति में उनके पास पांच से 10 साल का ही करियर है।
कांग्रेस में दलित चेहरे के तौर पर वह एक मजबूत विकल्प हो सकते हैं
कहा जा रहा है कि भाजपा में रहकर आर्य शायद ही कभी मुख्यमंत्री बन पाते। कांग्रेस में दलित चेहरे के तौर पर वह एक मजबूत विकल्प हो सकते हैं। पिछले दिनों कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार हरीश रावत ने भी बयान दिया था कि वह उत्तराखंड में शिल्पकार के बेटे को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। आर्य की घरवापसी को अब रावत के उस बयान से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
नड्डा के सामने संकेत दे चुके थे आर्य
भाजपा में अपनी नाराजगी के संकेत यशपाल आर्य राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के सामने दे चुके थे। पार्टी की कोर ग्रुप बैठक में आर्य ने कहा था कि साढ़े चार बाद भी उन्हें बाहरी पुकारा जा रहा है। इस पर नड्डा ने पार्टी नेतृत्व को इस बारे में ताकीद किया था। अपने मंत्रालयों में दखल को लेकर भी आर्य की लंबे समय से नाराजगी रही।
उनकी इस नाराजगी को कांग्रेस ने भांप लिया और पार्टी के नेताओं ने आर्य की घरवापसी का मार्ग तैयार करना शुरू कर दिया। जब तक भाजपा को इसकी खबर लगती, काफी देर हो चुकी थी। पार्टी ने मुख्यमंत्री को आर्य के घर पर भेजकर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन बात काफी आगे बढ़ चुकी थी।