उत्तराखंड: सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, आठ महीने में 884 मौतें, बिना लाइसेंस कार्यालय में प्रवेश नहीं
समीक्षा बैठक में सप्रे ने चारधाम मार्ग को दुर्घटनारहित बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा। चारधाम यात्रा मार्गों पर सीएसआर के तहत ट्रॉमा सेंटर और चालक विश्राम गृह स्थापित करने की संभावनाओं का परीक्षण करने के निर्देश भी दिए।
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सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष अभय मनोहर सप्रे ने कहा कि उत्तराखंड में इस वर्ष अगस्त तक 1480 सड़क हादसे हुए हैं, इसमें इसमें 884 लोगों की मौत हुई है। देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल में सबसे अधिक दुर्घटनाएं हुईं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में हादसों में जनहानि अधिक हुई है। उन्होंने सभी जिलों को सड़क हादसों में शून्य मृत्यु दर वाला जिला बनाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मानकों के अनुरूप कार्रवाई के निर्देश दिए।
मसूरी रोड स्थित एक होटल में सड़क सुरक्षा की समीक्षा बैठक में सप्रे ने चारधाम मार्ग को दुर्घटनारहित बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा। चारधाम यात्रा मार्गों पर सीएसआर के तहत ट्रॉमा सेंटर और चालक विश्राम गृह स्थापित करने की संभावनाओं का परीक्षण करने के निर्देश भी दिए। चेकिंग व्यवस्था मजबूत करने के लिए एनपीआर कैमरों समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अधिकतम इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठक हर माह अनिवार्य रूप से कराने और कार्रवाई का विवरण मंत्रालय के पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए।
बिना लाइसेंस और इंश्योरेंस कार्यालय में प्रवेश नहीं
सप्रे ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों और सरकारी संस्थानों में बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों को प्रवेश न दिया जाए। दोपहिया वाहन चालकों के पास वैध लाइसेंस और हेलमेट भी अनिवार्य रूप से जांचे जाएं। बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव परिवहन रविनाथ रामन, सचिव रणवीर सिंह चौहान, निदेशक यातायात कृष्ण कुमार, अपर सचिव परिवहन रीना जोशी, अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
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यह निर्देश भी दिए
- पीएम राहत योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए, क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया जाए।
- लावारिस पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम को नीति बनाए
- वर्तमान में स्थापित एनएनपीआर कैमरों में चिह्नित ट्रैफिक वॉयलेशन में अन्य अभियोगों को भी सम्मिलित किया जाए।
- चालक लाइसेंस जारी करने से पहले चालकों की परीक्षा कंप्यूटराइज्ड आधार पर लेने के लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की स्थापना करें।
- उच्चतम न्यायालय ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा के निर्देश दिए हैं, उक्त निर्देशों के अनुपालन में नियमावली और एसओपी तैयार करे
15 हजार किमी सड़क नेटवर्क 5714 किमी पर ही क्रैश बैरियर
राज्य में करीब 15 हजार किमी सड़क नेटवर्क के बावजूद हजारों किमी मार्ग पर क्रैश बैरियर नहीं लगे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटना की स्थिति में वाहनों को गहरी खाई में गिरने से बचाने के लिए क्रैश बैरियर जरूरी हैं।
राज्य में कुल 15,122.85 किमी सड़क नेटवर्क है। इसमें 8422.78 किमी मार्ग क्रैश बैरियर के लिए चिह्नित है, लेकिन अब तक 5714.96 किमी पर ही बैरियर लगाए जा सके हैं। 2702.82 किमी मार्ग पर अभी काम बाकी है। वहीं, 6700 किमी सड़क को क्रैश बैरियर के लिए चिह्नित ही नहीं किया गया है।
सड़क सुरक्षा को लेकर हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष अभय मनोहर सप्रे ने शेष मार्गों पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए समय-सीमा तय कर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि क्रैश बैरियर आईआरसी मानकों के अनुरूप हों।
राज्य के 2559 स्थान सड़क हादसों के लिहाज से संवेदनशील चिह्नित किए गए थे। इनमें 2140 स्थानों पर सुधारात्मक कार्य हो चुका है, जबकि 419 पर काम बाकी है। इसके अलावा 179 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे, जिनमें 169 पर सुधारात्मक कार्य पूरा किया जा चुका है।