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Uttarakhand Chunav 2022: सल्ट विधानसभा सीट पर दो सूरमाओं के बीच होगा घमासान

Sat, 12 Feb 2022 04:15 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजीव शुक्ला, संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
राजीव शुक्ला, संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 12 Feb 2022 04:15 PM IST
सार

भाजपा प्रत्याशी विकास तो कांग्रेस प्रत्याशी पांच वर्षों में विकास न होने की बात कहकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। 

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uttarakhand election 2022: There will be a tussle between two big leader on Salt assembly seat
भाजपा विधायक महेश जीना - फोटो : Facebook Page

विस्तार

भौगोलिक दृष्टि से बेहद जटिल सल्ट विधानसभा सीट पर कांग्रेस और भाजपा के सूरमाओं के बीच घमासान है। इस बार किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में कोई  बयार नहीं है और जनता की खामोशी प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ा रही है। भाजपा प्रत्याशी विकास तो कांग्रेस प्रत्याशी पांच वर्षों में विकास न होने की बात कहकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। 

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सल्ट विधानसभा सीट से भाजपा के महेश जीना विधायक हैं। पार्टी ने उन्हीं पर भरोसा जताते हुए दोबारा चुनाव समर में उतारा है। दूसरी ओर 2017 के चुनाव और इस सीट पर हुए उपचुनाव में हार का मुंह देख चुकी कांग्रेस ने इस बार रणजीत सिंह रावत पर दांव लगाया है। रावत ने वर्ष 2017 का चुनाव रामनगर विधानसभा सीट से लड़ा था और उनको हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके बाद भी रावत पांच वर्षों से रामनगर में ही डटे हुए थे।
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सल्ट में उनकी विरासत उनके बेटे विक्रम रावत संभाल रहे थे। ब्लॉक प्रमुख होने के साथ ही विक्रम ने क्षेत्र से जुड़े रहने की कोशिश की। 2022 के चुनाव में कांग्रेस में बदले अंदरूनी समीकरण के कारण रणजीत को रामनगर की जगह सल्ट सीट से मैदान में उतार गया। पांच वर्ष बाद रावत एक बार फिर से जनता के बीच हैं। रावत पांच वर्षों में बेरोजगारी, बदहाल सड़कें और महंगाई का मुद्दा उछाल रहे हैं। साथ ही मेक इन इंडिया, बुलेट ट्रेन और 15-15 लाख रुपये खाते में आने के केंद्र सरकार के वादे को लेकर भी निशाना साध रहे हैं। 
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दूसरी ओर महेश जीना पांच वर्षों में किए गए विकास कार्यों की दुहाई दे रहे हैं। जनता को बता रहे हैं कि कोविड कॉल में क्या-क्या किया। कितने करोड़ की योजनाएं राज्य सरकार से स्वीकृत कराईं। कुछ योजनाओं का काम पूरा हो चुका है तो कुछ का होना शेष है। लोगों को बता रहे हैं कि सड़कों का जाल बिछाया गया है। महेश जीना अपने छोटे भाई स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह जीना के कार्यकाल में हुए काम गिना रहे हैं और लोगों की मदद की बात भी कर रहे हैं। लोगों को याद दिला रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर वह लोगों के साथ हमेशा खड़े रहे।

बहरहाल दोनों ही प्रत्याशी विकास के दावों के बीच जनता के बीच हैं, साथ ही जातीय समीकरण भी साधने में जुटे हैं। आम आदमी पार्टी के सुरेश बिष्ट दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की उपलब्धियों के सहारे नैय्या खे रहे हैं। वह भाजपा-कांग्रेस को कोसने के साथ ही राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी की पर्याप्त व्यवस्था और रोजगार के नए अवसर तलाशने का लोगों से वादा कर रहे हैं। इनके अलावा बसपा के भोले आर्या, सपा के भूपेंद्र सिंह, यूकेडी के राकेश कुमार गोस्वामी, उपपा के जगदीश चंद्र, निर्दलीय ललित मोहन सिंह और सुरेंद्र सिंह भी चुनावी मैदान में हैं। 

दिग्गजों के अखाड़े से सल्ट सीट का इतिहास
वर्ष 2002 और 2007 में सल्ट विधानसभा सीट से रणजीत सिंह रावत विधायक रहे। 2012 के चुनाव में रणजीत को शिकस्त दे सुरेंद्र सिंह जीना विधायक बने। वर्ष 2017 के चुनाव में भी सुरेंद्र ही विधायक चुने गए। सुरेंद्र के निधन के बाद 2021 के उपचुनाव में उनके भाई महेश जीना को जनता ने विधानसभा में पहुंचाया। 

कुल मतदाता = 97035
पुरुष मतदाता = 49792
महिला मतदाता = 47243

स्थानीय मुद्दे 
लगातार बढ़ रही बेरोजगारी और महंगाई ने मतदाताओं को परेशान कर रखा है। साथ ही खस्ताहाल सड़के भी ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बन रहीं हैं। खराब सड़कों के कारण लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है और रोजमर्रा का सामान लाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जंगली जानवरों से सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं हैं। 

भाजपा ने सल्ट के विकास की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर डाली है। छोटे भाई स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह जीना के जो भी काम छूट गए हैं उनको पूरा किया जाएगा। उनका सपना था कि सल्ट विधानसभा क्षेत्र को आदर्श बनाया जाए। इसी उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रहा हूं। छह माह से विधायक के तौर पर काम कर रहा हूं। पेयजल की साढ़े तीन सौ करोड़ की योजनाओं को पूरा किया है। 29 रोड लोनिवि, 26 सड़कें पीएमवाईजीएस से स्वीकृत हो गई हैं। 34 सड़कों पर डामरीकरण कराया गया।  27 सड़कें स्वीकृत होने के कगार पर थीं मगर आचार संहिता लग गई। एक करोड़ की धनराशि विधायक निधि से अस्पतालों के उच्चीकरण के लिए दी।

- महेश जीना, भाजपा प्रत्याशी 

मैं परीक्षार्थी हूं। मेहनत करके परीक्षा दे रहा हूं। नंबर देना जनता का काम है। महंगाई, बेरोजगारी और विकास के मुद्दे लेकर जनता के बीच आया हूं। कांग्रेस हमेशा विकास की बात करती है। कांग्रेस के राज में खाने का तेल 70 रुपये लीटर और रसोई गैस सिलिंडर चार सौ रुपये का था। आज तेल की कीमत दो सौ रुपये प्रति लीटर से अधिक है जबकि रसोई गैस एक हजार रुपये तक पहुंच गई है। पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। प्रदेश में बेरोजगारी छह गुना बढ़ गई है। 42 करोड़ की लागत से हॉटमिक्स रोड बनवाई थी आज सड़क पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। विधायक रहते हुए एक हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य स्वीकृत कराए थे।
- रणजीत सिंह रावत, कांग्रेस प्रत्याशी 

उत्तराखंड राज्य बने 21 साल हो गए हैं, लेकिन आधारभूत ढांचा तक अभी उपलब्ध नहीं हुआ। राष्ट्रीय दलों ने बारी-बारी से राज्य को गर्त में धकेल दिया। इसलिए आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड के नवनिर्माण की जिम्मेदारी ली है। जनप्रतिनिधियों ने विकास के बदले आर्थिक शोषण किया है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच पहाड़ का जनजीवन भी जटिल है। 21 सालों में पिछड़े क्षेत्रों की सुध नहीं ली गई है। मैं राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी की पर्याप्त व्यवस्था और रोजगार के नए अवसर तलाशने के विजन के साथ चुनाव मैदान में हूं। भ्रष्टाचार मुक्त राज्य का निर्माण करना मेरी और मेरी पार्टी की प्राथमिकता है।
- सुरेश बिष्ट, आप प्रत्याशी

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