Harak Singh Rawat: भाजपा सरकार में रहकर सीधे सीएम से टकराव, कर्मकार बोर्ड से हटाने पर खोला था मोर्चा
हरक सिंह रावत के इस भाजपा सरकार के कार्यकाल में सबसे चर्चित विवाद कर्मकार बोर्ड का हुआ।
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हरक सिंह रावत ने भाजपा ज्वॉइन की, पार्टी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया, लेकिन उनका पांच साल का यह कार्यकाल विवादों से भरा रहा। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप पार्टी के ही नेताओं ने लगाए लेकिन पार्टी असहज होकर उन्हें सहन करती रही।
हरक के इस भाजपा सरकार के कार्यकाल में सबसे चर्चित विवाद कर्मकार बोर्ड का हुआ। दरअसल, त्रिवेंद्र सरकार ने कर्मकार बोर्ड भंग कर दिया, जिसके अध्यक्ष पद पर हरक काबिज थे। हरक को हटाने के बाद त्रिवेंद्र सरकार ने यहां शमशेर सिंह सत्याल को जिम्मेदारी दे दी। सत्याल के कार्यकाल में कर्मकार बोर्ड का ऑडिट हुआ, जिसमें कई तरह की गड़बड़ियों के आरोप लगे।
त्रिवेंद्र रावत के सीएम पद से हटने के बाद हरक ने उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया। पहले तो उन्होंने शमशेर सत्याल को निशाना बनाकर अनर्गल बयानबाजी की, जिससे पार्टी असहज हुई। इसके बाद उन्होंने त्रिवेंद्र रावत को लेकर तमाम विवादित बयान दिए। इससे भी पार्टी कई बार असहज हुई। इसके बाद कर्मकार बोर्ड को लेकर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर हुई, जिसमें बाद में सरकार ने भ्रष्टाचार न होने का जवाब दाखिल किया।
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दिलीप रावत से टकराव
लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत से हरक का टकराव पिछले कुछ महीनों में बढ़ता चला गया। उन्होंने दिलीप को लेकर तमाम तरह के बयान दिए। हरक, लैंसडौन सीट से अपनी पुत्रवधू अनुकृति को चुनाव लड़वाना चाहते थे। इसी टकराव ने उन्हें निष्कासन तक पहुंचा दिया।
बार-बार दिल्ली दौड़
बात-बात पर रूठने की फितरत और फिर दिल्ली में आला नेताओं के सामने शिकायत का सिलसिला हरक ने खूब चलाया। इन पांच साल के कार्यकाल में करीब 20 बार तो वह रूठकर दिल्ली के नेताओं के पास पहुंचे। इससे भी पार्टी कई बार असहज हुई।