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Uttarakhand Assembly Election 2022: उत्तराखंड की भाजपा सरकार भ्रष्टाचारी - सुरजेवाला

Thu, 10 Feb 2022 11:46 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 10 Feb 2022 11:46 AM IST
सार

सुरजेवाला ने कहा कि उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री पर एक पत्रकार ने आरोप लगाया था कि 2016 में भाजपा के झारखंड प्रभारी रहने के दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को गो-सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाने के लिए उससे 25 लाख की रिश्वत ली थी और रुपये अपने रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर कराए थे।

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Uttarakhand Election 2022: BJP government of Uttarakhand is corrupt says Randeep Singh Surjewala
रणदीप सिंह सुरजेवाला, महासचिव, कांग्रेस - फोटो : ANI FIle Photo

विस्तार

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार को भ्रष्टाचारी सरकार की संज्ञा दी है। उन्होंने भाजपा सरकार पर खुला आरोप लगाया कि प्रदेश में इस सरकार ने छह महापाप किए हैं। भाजपा और भ्रष्टाचार को जनता वोट की चोट से दूर करेगी। सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर 90 दिन में गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाएगा।

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तत्कालीन मुख्यमंत्री पर एक पत्रकार ने लगाया था आरोप
यहां स्वराज आश्रम में पत्रकारों से बातचीत में सुरजेवाला ने कहा कि उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री पर एक पत्रकार ने आरोप लगाया था कि 2016 में भाजपा के झारखंड प्रभारी रहने के दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को गो-सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाने के लिए उससे 25 लाख की रिश्वत ली थी और रुपये अपने रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर कराए थे। भाजपा ने इसकी जांच के बजाय पत्रकार पर ही राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया। पत्रकार ने जब हाईकोर्ट की शरण ली तो कोर्ट ने सीबीआई जांच के निर्देश दिए, मगर सरकार जांच के बजाय सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट चली गई, जहां मामला विचाराधीन है। 
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भाजपा सरकार ने कुंभ मेले के दौरान 11 लैबों को कोविड टेस्ट का ठेका दिया लेकिन लाखों फर्जी टेस्ट दिखाकर लाखों रुपये डकार लिए। खुलासा तब हुआ जब पंजाब के एक शख्स को कुंभ मेले में आरटी-पीसीआर टेस्ट का मैसेज आया, जबकि वह कुंभ गए ही नहीं। इतना ही नहीं जिस कंपनी को जांच का जिम्मा दिया था उसने ऐसी कंपनी को इस काम का जिम्मा दे दिया, जिसके पास आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने का लाइसेंस ही नहीं है। फर्जीवाड़े का एक उदाहरण ये भी है कि इस कंपनी ने हरिद्वार के नेपाली फार्म एरिया से 3,925 सैंपल इकट्ठे करने की बात कही थी लेकिन बाद में पता लगा कि सबके नाम पर एक ही मोबाइल नंबर दर्ज थे। भाजपा सरकार ने बाकी कंपनियों की जांच ही नहीं कराई।

उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने 3 हजार करोड़ का चारा घोटाला किया। एक पूर्व केंद्रीय मंत्री ने 5 जनवरी 2021 को तत्कालीन सीएम को पत्र लिखकर उत्तराखंड शीप एवं वूल डेवलपमेंट बोर्ड में भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगाए। पत्र में साफ कहा गया था कि बोर्ड ने वर्ल्ड बैंक से 3,000 करोड़ का ऋण लेकर इसका सीधे तौर पर दुरुपयोग किया है। कहा गया कि नियम ताक पर रखकर पशुओं के लिए पंजाब की फर्म से दोगुने दाम पर चारा खरीदा गया। शीप बोर्ड में बिना पद सृजन के डेपुटेशन पर कई अधिकारियों को तैनात किया गया। इस कारण कई पशु अस्पताल बंद हो गए। अधिकारी बिना काम के वेतन ले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया से जवान शीप के बजाय बूढ़ी भेड़ें खरीदीं गईं, जिनसे ज्यादा प्रजनन संभव ही नहीं है। 

चारा घोटाले में भाजपा के कौन से बड़े नेता संलिप्त हैं बताए
सूरजेवाला ने कहा कि प्रदेश सरकार उत्तराखंड के लोगों को बताए कि 3000 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में भाजपा के कौन से बड़े नेता संलिप्त हैं और अब तक इस घोटाले में क्या कार्रवाई की गई है। कंस्ट्रक्शन वर्कर कल्याण बोर्ड में टूल किट, सिलाई मशीन, साइकिल और अस्पताल निर्माण में घोटाला किया गाया है। चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ईएसआई हॉस्पिटल बनाने के लिए सरकार व कैबिनेट की मंजूरी के बिना ही एक कंपनी को 50 करोड़ का ठेका दे दिया गया। इतना ही नहीं कंपनी को 20 करोड़ रुपया का अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया, जबकि हकीकत यह थी कि अग्रिम भुगतान करने तक हॉस्पिटल बनाने के लिए जमीन का चयन तक नहीं हुआ था।

इस भ्रष्टाचार की जांच के लिए सरकार की ओर से गठित कमेटी ने 23 मार्च 2021 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। जांच में 20 करोड़ का गबन होने की पुष्टि भी हुई। उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका में 2020 में कंस्ट्रक्शन वर्कर कल्याण बोर्ड में श्रमिकों को टूल किट, सिलाई मशीनें एवं साइकिलें देने के भ्रष्टाचार की सप्रमाण शिकायत की गई। शिकायत पर अक्तूबर 2020 में बोर्ड को भंग कर दिया गया। जब श्रम आयुक्त उत्तराखंड की ओर से जांच कराई गई तो कई सफेदपोशों के नाम आने पर जांच अधिकारी को हटाकर कार्रवाई बंद कर दी गई। 


सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार में उत्तराखंड में हजारों करोड़ की नकली दवाओं का धंधा पनप रहा है। मंगलवार को ही ऊधमसिंह नगर में नकली दवाइयों की फैक्टरी पकड़ी गई, जहां करोड़ों की फर्जी दवाई बनाने का खुला खेल चल रहा था। इससे पहले रुद्रपुर में भी नकली एंटीबायोटिक्स व दूसरी दवाइयों के खेल का खुलासा हुआ था। दिसंबर 2018 में भी इसी प्रकार नकली दवाइयों के जाल का खुलासा हुआ। अप्रैल 2021 में कोरोना काल में कोटद्वार में फर्जी रेमडिसिविर इंजेक्शन बनाने का खुलासा हुआ व भारी मात्रा में फर्जी इंजेक्शन पकड़े गए। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक देश की 20 प्रतिशत नकली दवाइयां उत्तराखंड में धड़ल्ले से बनाई जा रहीं हैं। 2018 से नकली दवाइयां बनाने और बेचने के इस जानलेवा धंधे का बार-बार खुलासा हुआ है, पर कार्रवाई कुछ नहीं। 

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में खनन माफिया को खुला संरक्षण है और गाड़-गधेरे, नदी-नाले खोद दिए गए हैं।  बालू-बजरी पर 10 प्रतिशत तक के कट का खेल चल रहा है। कहा कि बीते दिनों बागेश्वर में अवैध खनन के खेल में लगे कई डंपरों को पकड़ा गया, मगर भाजपा सरकार ने उन पर कार्रवाई नहीं की बल्कि मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी ने सीएम के मौखिक निर्देश पर उनका चालान निरस्त करने के लिए पत्र लिखा। इस मामले में पहले पीआरओ को हटाया गया लेकिन बाद में बहाल कर दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री धामी को खनन मित्र करार दिया।

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